परिवहन मंत्री बोले- रोकी जा सकती हैं दुर्घटनाएं
रिपोर्ट जारी होने पर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि हमें पहली रिपोर्ट जारी करते हुए गर्व हो रहा है। इसमें सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण के आधार पर अधिक जोखिम वाले बिंदुओं की पहचान कर रहे हैं। पहचान के बाद इन स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम उठाए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। अध्ययन और सड़क के मौजूदा स्वरूप में बदलाव ने साबित कर दिया है कि दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। इन साक्ष्यों पर आधारित रिपोर्ट से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रमुख सचिव सह परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा ने कहा कि रिपोर्ट में दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। इससे स्पष्ट होता है कि पैदल चलने वाले और दोपहिया वाहन चालकों को अधिक खतरा होता है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. सारा व्हाइटहेड ने कहा कि परिवहन विभाग की सड़क सुरक्षा प्रमुख एजेंसी के साथ सहयोग करने और दुर्घटना के लिहाज से जोखिम वाले बिदुओं की पहचान के लिए तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। रिपोर्ट के निष्कर्ष से डिजाइन में बदलाव और घातक दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। इससे लोगों की जानें बचाई जा सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2017 में रोड सेफ्टी लीड एजेंसी (आरएसएलए) का गठन किया गया था।
दिल्ली सड़क दुर्घटना मृत्यु रिपोर्ट के निष्कर्ष
. मोटर साइकिल चालक और पीछे बैठने वाली 45 फीसदी सवारी जबकि सड़क हादसे में 40 प्रतिशत मौतें हुई हैं।
. 2020 में होने वाली कुल 1,197 मौतों से 89 फीसदी मामले पैदल चलने वाले, दोपहिया और साइकिल चालकों की हुई है।
. 30-34 और 50-54 वर्ष की आयु के पुरुषों के लिए मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक है। 60 वर्ष से अधिक उम की महिलाओं को सड़क दुर्घटना में जान का जोखिम होने की बात सामने आई।
. दोपहिया चालकों में 20 से 34 साल के बीच आयु के सर्वाधिक 179 पुरुषों की 2020 में मौतें हुईं।
. पैदल चलने वालों की मृत्यु पुरुषों और महिलाओं की उम्र के साथ धीरे-धीरे बढ़ती गई। पैदल चलने वाले एक लाख लोगों में 65-69 वर्ष के आयु वर्ग के पुरुष जबकि 70-74 वर्ष की आयु की महिलाएं सर्वाधिक थीं।
. सप्ताह भर रोजाना रात आठ बजे से एक बजे के बीच सर्वाधिक दुर्घटनाएं हुईं, लेकिन रात 12 बजे से एक बजे तक सर्वाधिक घटनाएं हुईं। बृहस्पतिवार, शुक्रवार और रविवार रात 10 बजे से रात 12 बजे के बीच होने वाली दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौतें हुई हैं। इस दौरान रविवार रात 12 से दो बजे का वक्त मौत के लिहाज से सर्वाधिक घातक माना गया है।
. सड़क दुर्घटनाओं के मृतकों में 475 पैदल चलने वाले थे जबकि 60 फीसदी से पैदल चलने वालों की मौत के मामले हिट-एंड-रन के थे।
आउटर रिंग रोड पर हुई सर्वाधिक मौतें
. अधिक जोखिम वाले कॉरिडोर के तौर पर जीटीके रोड-आजादपुर गोल चक्कर से सिंघु, वजीराबाद रोड और पुस्ता रोड। इन पर प्रति किलोमीटर सबसे ज्यादा मौतें हुईं। आउटर रिंग रोड और रिंग रोड पर 2020 में सबसे अधिक मौतें हुईं।
. उच्च जोखिम वाले क्षेत्र: आजादपुर चौक, बाहरी रिंग रोड का चौराहा और वजीराबाद रोड औरफॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी रोहिणी, सेक्टर 14 - आउटर रिंग रोड के सामने का स्ट्रेच को अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना गया है।