नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के मामलों में जांच पर उठ रहे सवालों व फटकार के बाद पुलिस ने उसकी पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) को बदल दिया है। पुलिस ने अदालत को बताया कि एसपीपी डीके भाटिया के स्थान पर अभियोजक मधुकर पांडे मामलों की पैरवी करेंगे।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने हाल ही में कई मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कई आरोपियों को आरोपमुक्त भी किया था।
अदालत ने पुलिस से कई मामलों में एक ही प्राथमिकी दर्ज करने पर सवाल किया था कि ऐसे में दायर आरोपपत्र कानून में कैसे टिकाऊ है। अदालत ने भाटिया से पूछा था कि क्या यह कानूनी सिद्धांत को खतरे में नहीं डालेगा कि एक व्यक्ति पर एक ही अपराध के लिए दो बार मुकदमा चलाया जा रहा है।
अदालत में लगातार सुनवाई में पुलिस की किरकिरी को देखते हुए एसपीपी को बदल दिया गया। पुलिस ने 9 सितंबर को अदालत को सूचित किया कि भाटिया की जगह अभियोजक मधुकर पांडे ने ले ली है। ऐसे में अदालत ने पुलिस के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि सभी मामलों की जानकारी मधुकर पांडे को देने के लिए समय प्रदान किया जाए।
अदालत के समक्ष हालांकि अभियोजन पक्ष ने मामले पर बहस करने के लिए दो महीने का समय मांगा लेकिन अदालत ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि न्याय के हित में और राज्य को प्रभावी प्रतिनिधित्व देने के लिए सुनवाई 5 अक्तूूबर तय करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तिथि पर दोनों पक्ष बहस को आगे बढ़ाने के लिए तैयार रहें।
अदालत मोहम्मद शादाब, राशिद सैफी और शाह आलम और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ जीशान की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी पर सुनवाई कर रही है। इसी एक मामले में अदालत ने शादाब, सैफी और आलम को 2 सितंबर को आरोपमुक्त कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में एक अन्य शिकायत को मुख्य शिकायत के साथ संलग्न कर दिया था।