समिति ने सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा के खिलाफ सख्त रुख अपना रखा है। समिति को कंगना रनौत द्वारा अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट के बारे में शिकायतें मिली हैं। बताया गया कि रनौत के इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच काफी ज्यादा है। दुनिया भर में लगभग 80 लाख लोगों द्वारा इसका अनुसरण किया जा रहा है।
कंगना ने अपनी पोस्ट से कथित तौर पर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है जो कि समाज की शांति और सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकती है। रनौत ने 20 नवंबर को स्टोरी पोस्ट की थी। जिसमें लिखा था कि खालिस्तानी आतंकवादी आज सरकार का हाथ मरोड़ सकते हैं। लेकिन इन्हें नहीं भूलना चाहिए कि एक महिला ने इनको अपनी जूती के नीचे कुचला था। इसकी वजह से चाहे कितनी भी दिक्कतें क्यों न हुई हों लेकिन उसने अपनी जान की कीमत पर उन्हें मच्छरों की तरह कुचल दिया। लेकिन देश के टुकड़े नहीं होने दिए। उनकी मृत्यु के दशकों बाद भी ये आज उसके नाम से कांपते हैं। इन्हें वैसा ही गुरु चाहिए।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक कंगना रनौत ने कथित रूप से पोस्ट से सिख समुदाय के लोगों की भावनाओं को बहुत आहत किया है। पूरे समुदाय का अनादर करने से दिल्ली में शांति और सद्भाव में व्यवधान की स्थिति पैदा हो सकती है। शिकायतकर्ता के अनुसार उसे सभी के सामने खालिस्तानी कहा जाता था। यह न केवल उसके लिए चौंकाने वाला था,बल्कि उसके परिवार और खुद की सुरक्षा के बारे में उसके आशंकाएं भी पैदा करता था।
फेसबुक मामले की चल रही सुनवाई
गौरतलब है कि दिल्ली दंगा मामले में आपत्तिजनक पोस्ट डालने से जुड़े मामलों में फेसबुक के खिलाफ समिति सुनवाई कर रही है। बीते हफ्ते बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि वह फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के एक माह पहले और दो माह के बाद का यूजर रिपोर्ट (शिकायत) डाटा पेश करे। शांति एवं सद्भाव समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने फेसबुक इंडिया के पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर शिवनाथ ठुकराली ओर से पेश प्रतिवेदन पर विचार करते हुए उपरोक्त निर्देश दिया।