चांद बाग में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान मोहसिन पर किया था हमला
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान 22 वर्षीय मोहसिन की हत्या के मामले में पांच दोषियों की सात-सात साल की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने पांचों की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
अदालत ने कहा कि चश्मदीद गवाह के बयान से साबित होता है कि पांचों आरोपी हथियारों से लैस भीड़ में सबसे आगे थे और दूसरों को मोहसिन पर हमला करने के लिए उकसा रहे थे। पुलिस बैरिकेड के पास गिरने के बाद भी मोहसिन को घेरकर पीटा गया था। अदालत ने कहा कि यह पता नहीं चलना कि सिर पर जानलेवा चोट किसने मारी, आरोपियों को बरी करने का आधार नहीं हो सकता।
सजा को चुनौती देने वाले आरोपियों में अमन कश्यप, देविंदर कुमार, प्रदीप राय, आशीष और अरुण कुमार शामिल हैं। उन्होंने दलील दी थी कि स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया और उनके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। निचली अदालत ने 20 नवंबर 2024 को पांचों को गैर इरादतन हत्या और घातक हथियारों से दंगा करने का दोषी ठहराया था। अभियोजन के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को चांद बाग इलाके में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान मोहसिन पर हमला किया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी।