दिल्ली दंगों के मामले में अपराध स्थल एक लेकिन प्राथमिकी दो थानों में अलग-अलग दर्ज करने पर अदालत ने पुलिस के रवैये पर हैरानी जताई है। अदालत ने उत्तर पूर्व जिले के डीसीपी को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि पुलिस विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दो प्राथमिकी कैसे दर्ज कर सकती है, जबकि दंगों का केंद्र या वह स्थान जहां से कथित पेट्रोल बम और गोलीबारी हुई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने यह सवाल आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन व अन्य के खिलाफ दयाल पुर थाने में दर्ज प्राथमिकी मामले में अभियोग पर सुनवाई के दौरान उठाया है। उन्होंने अदालत में उपस्थित क्षेत्रीय एसीपी गोकलपुरी और दयालपुर थानाध्यक्ष से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा लेकिन दोनों ही कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय डीसीपी को निर्देश दिया कि वे स्पष्ट करे कि जब दंगों के केंद्र यानि ताहिर हुसैन के घर से पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे और फायरिंग की गई थी तो दो अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई है।
अलग-अलग समुदाय के लोगों पर फेंके गए थे पेट्रोल बम
सुनवाई के दौरान हुसैन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता रिजवान ने अदालत का ध्यान इस और दिलवाते हुए कहा कि दयालपुरा थाने के अलावा एक मामला खजूरी खास थाने में भी उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज किया गया है। इस प्राथमिकी में भी हुसैन के खिलाफ इसी तरह के आरोप हैं कि उनके घर की छत से पेट्रोल बम अलग-अलग समुदाय के लोगों पर फेंके गए थे।
पूरक आरोप पत्र दायर करने की मांग की गई, अब तक दायर नहीं
उन्होंने सवाल उठाया कि विचाराधीन प्राथमिकी में आरोप समान है तो दूसरे थाने में मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान विशेष अभियोजन अधिकारी डीके भाटिया ने इस आधार पर बहस शुरू करने के लिए 30 दिन का समय स्थगित करने की मांग की थी कि पूरक आरोप पत्र सीएमएम कोर्ट में दाखिल होने वाला है। अदालत ने कहा जो पूरक आरोप पत्र दायर करने की मांग की गई है वह अब तक दायर नहीं किया गया है। यह किसी भी मामले में स्थगन की मांग का आधार नहीं हो सकता है क्योंकि पूरक आरोप पत्र इस अदालत में प्रतिबद्ध होने के बाद, अभियोजन पक्ष हमेशा आरोप में संशोधन की मांग कर सकता है।