दक्षिण-पूर्व जिला डीपीसी ईशा पांडेय ने बताया कि दक्षिण-पूर्व दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को पकडने के लिए साइबर थाना प्रभारी कुलदीप शेखावत की देखरेख में एसआई मनोज भास्कर की टीम गठित की गई। पुलिस टीम चार मार्च को तुगलकाबाद एक्सटेंशन में गश्त कर रही थी। पुलिस टीम को देखकर वहां घूम रहे नाइजीरियन ने अपनी चाल बदल ली और वह भागने लगा। पुलिस टीम ने डोनाटस ओडिप्को ओकोए को गिरफ्तार कर लिया।
दूसरे नाम से आया था भारत
आरोपी ने बताया कि वह आईवरी कोस्ट के पासपोर्ट पर कोन आदमा नाम से वर्ष 2016 में भारत आया था। ये वर्ष 2018 में नाइजीरियन बॉस से मिला। वह मुंबई में मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा। मुंबई पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। जमानत मिलने के बाद ये मुंबई से फरार होकर दिल्ली आ गया। यहां वह उत्तम नगर में रहने लगा। वह ठगी करने वाले नाइजीरियन गिरोह से मिला और ठगी करने लगा।
एक व्यक्ति से ठगते थे 8-10 करोड़
गिरोह कस्टम क्लीयरेंस के बहाने लोगों के साथ ठगी करता था। वह गिरोह के एटीएम से पैसे निकालता था। इस काम के लिए उसे ठगी की रकम में से 15 से 20 फीसदी कमीशन मिलता था। आरोपी विदेशी नागरिक ने बताया कि उसका जाली पासपोर्ट उसके एक सहयोगी ने बनाया था। वह अभी जालसाजी के मामले में बैंगलुरु जेल में बंद है। कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर ये एक व्यक्ति से 8-10 करोड़ रुपये ठगते थे।