सीमापुरी चौक पर पहुंचे तो देखा कि गोलचक्कर के पास लोगों की भीड़ जुटी थी, हमारी टीम ने वहां पहुंचकर गाड़ी रोकी तो एकाएक बुजुर्ग ने पूछा कि बेटा कहां जाओगे। आग वाले घटना स्थल का जिक्र करते ही तुरंत बुजुर्ग ने हमारे साथ 15 वर्षीय किशोर राहुल को भेज दिया।
जैसे-जैसे हम घटना स्थल की ओर बढ़ते गए, जगह-जगह लोग झुंड बनाए खड़े दिखे। सभी लोग हादसे की चर्चा कर रहे थे। हर किसी की जुबान पर बस यही बात थी कि परिवार के साथ बहुत बुरा हुआ। हम होरीलाल के घर पास पहुंचे तो वहां सैंकड़ो लोग मौजूद थे। हादसे की खबर सुनकर दूर-दूर से लोग वहां पहुंच रहे थे। धीरे-धीरे होरीलाल के रिश्तेदारों व परिचितों का तांता घर पर जुटने लगा था।
घर के बराबर में ही बने मंदिर में लोगों के बीच अक्षय पत्थर बना बैठा हुआ था। लोग उसे समझा रहे थे, लेकिन वह किसी की बात का कोई जवाब नहीं दे रहा था। इलाके के सभी नेता घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना देने का प्रयास कर रहे थे। सबसे अधिक हालत रीना की छोटी बहन निशा की थी। परिजन उसे भी समझाने का प्रयास कर रहे थे।
होरीलाल के घर के बाहर खड़े लोग मकान की ओर इशारा कर एक दूसरे को आग लगाने वाली मंजिल को दिखाते हुए दिख रहे थे। घटना स्थल के पास खड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मकान बनाने के बाद बहुत ही छोटी सीढ़ियां बना दी गई। ऐसे में किसी भी इमरजेंसी के दौरान बिल्डिंग से निकलने की गुंजाइश बेहद कम थी। हालांकि सब कुछ एक कमरे में हो गया। वहां से निकलने की जरूरत ही नहीं पड़ी।