गत वर्ष कोरोना की रोकथाम के लिए लगे लॉकडाउन की वजह से कई लोगों के आगे नौकरी का संकट खड़ा हो गया था। महमारी ने कई लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया गया था। इसी में शामिल हैं तालकटोरा स्टेडियम के पास छोले व राजमा चावल बेचने वाले दंपती अमृता व करन। इनके राजमा चावल के साथ इनकी संघर्ष की कहानी के चर्चे अब दिल्ली ही नहीं बल्कि विदेश तक पहुंच चुके हैं और अमेरिका, कनाडा व अन्य देशों से भारतीय इनसे मिलने की चाहत रखते हैं।
दरअसल, करन पहले एक सांसद के यहां ड्राइवर का काम करते थे। अचानक से लगे लॉकडाउन से उनकी जिदंगी में भी रफ्तार पर ब्रेक लग गया। सांसद के यहां से नौकरी गई तो रहने के लिए मिली सरकारी छत को भी छोड़ना पड़ा। इसके बाद रहने का संकट भी खड़ा हो गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। ससुर ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए गुजारा बसर करने के लिए कुछ समय के लिए गाड़ी दे दी।
दो महीने तक गाड़ी को ही बनाया घर
गाड़ी मिलने के बाद दंपती ने गाड़ी को ही आशियाना बनाया। करीब दो माह तक दोनों गाड़ी में ही सोते और गुरुद्वारे के सहारे रोटी और सब्जी पर गुजारा होता। इसके बाद पत्नी अमृता के कहने पर गाड़ी में ही होटल खोलने का विचार किया। इसके लिए घर का सामान बेचकर होटल खोलने की तैयारी की।
नवंबर में वायरल हुआ वीडियो
दंपती की कहानी व संघर्ष को लेकर गत वर्ष नवंबर में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद दोनों की कहानी को न सिर्फ दिल्ली वासियों ने सराहा बल्कि देश के साथ विदेश तक कहानी के चर्चे हुए। इसके बाद दिल्ली के दूर दराज के लोग दंपती से मिलने व मदद के लिए पहुंचे। करन ने बताया कि वर्तमान में अमेरिका, कनाडा व अन्य देशों में रह रहे भारतीयों ने वीडियों देखने के बाद मिलने की मंशा जताई है। साथ ही विदेश में भी उनके राजमा व छोले चावल प्रसिद्ध हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसमें विदेश में पढ़ रहे विद्यार्थियों का समूह भी शामिल है जो मिलने की चाहत रखता है।
भविष्य में अपना रेस्तरां खोलने की है तैयारी
दंपती ने बताया कि भविष्य में कभी होटल चलाने का सोचा नहीं था। अब इसी के सहारे जीवन चलाने का मन बना लिया है। यही वजह है कि भविष्य में अब अपना रेस्तरां खोलने का प्रयास है। दंपती ने बताया कि जनवरी के बाद से काम हल्का हो गया है, लेकिन आगे भी उम्मीद जारी रहेगी।