राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने टैंकरों से पार्कों में शोधित जल आपूर्ति के मुद्दे पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने का निर्देश दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को दिया है। यह आदेश एनजीटी ने एसडीएमसी की याचिका का निपटारा करते हुए दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वास्तविक हालात और पेयजल संरक्षित करने के जरूरत और फंड की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को उच्च प्रशासनिक स्तर पर बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता था।
एनजीटी का यह आदेश एसडीएमसी की उस याचिका पर आया है जिसमें उसने कहा था कि वह 6822 पार्कों की देखरेख करती है। पार्कों की सिंचाई के लिए उसके अपने ट्यूबवेल थे जिन्हें एनजीटी के आदेश पर सील कर दिया गया। इन पार्कों की सिंचाई के लिए डीजेबी को पर्याप्त प्रेशर वाले शोधित जल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी थी। जहां पाइपलाइन नहीं है वहां टैंकरों से पानी देना था।
याचिका में कहा गया कि शोधित जल की आपूर्ति के लिए डीजेबी पाइपलाइन डाल रहा है लेकिन तब तक 5357 पार्कों की सिंचाई के लिए टैंकरों से जल आपूर्ति करने की जरूरत है। इसके लिए टैंकरों की व्यवस्था करना एसडीएमसी की नहीं बल्कि डीजेबी की जिम्मेदारी है।
एसडीएमसी ने अपनी याचिका में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के मेंबर सेक्रेटरी के उस पत्र का भी हवाला दिया जिसमें डीजेबी को टैंकर किराए पर लेने का निर्देश दिया गया था। वहीं, याचिका में ये भी कहा गया कि जल बोर्ड एक्ट 1998 के तहत जल आपूर्ति और सीवेज की देखरेख डीजेबी की वैधानिक जिम्मेदारी है।
एनजीटी ने इससे पहले भूमिगत जल दोहन रोकने और पर्याप्त प्रेशर के साथ शोधित जल की आपूर्ति सार्वजनिक पार्कों में करने का निर्देश डीजेबी को दिया था। एनजीटी ने कहा था कि इस दिशा में कदम उठाने की जानकारी दी गई है लेकिन इस पर आगे काम होना चाहिए ताकि डीडीए और एसडीएमसी पार्कों के लिए ताजे पानी का प्रयोग न करें।