दिवाली की रात जमकर चले पटाखों के कारण शुक्रवार तड़के से ही हर ओर स्मॉग की घनी चादर फैली थी। इससे दृश्यता का स्तर भी काफी कम दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक, 4 नवंबर को पूरी दिल्ली में स्मॉग का पहला दिन दर्ज किया गया।
एयरपोर्ट पर सुबह 5 से लेकर 11 बजे तक दृश्यता का स्तर 600 से 800 मीटर रहा। वहीं, दिन में अधिकतम दृश्यता का स्तर 900 मीटर तक रहा। दिवाली से एक दिन पहले सफदरजंग व इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर दृश्यता का स्तर 1500 से तीन हजार मीटर रहा था। एनसीआर में सुबह के समय स्मॉग दर्ज हुआ है। पालम हवाई अड्डे पर दृश्यता सिर्फ 200 मीटर तक रही।
इन इलाकों में गंभीर रहे हालात
प्रदूषण के कारण दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हवा खतरनाक श्रेणी में रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 36 निगरानी केंद्रों में से 31 पर हवा 400 से अधिक एक्यूआई के साथ गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। सबसे गंभीर हालात सोनिया विहार, विवेक विहार, जहांगीरपुरी और नरेला के रहे। यहां का औसत एक्यूआई 480 से अधिक दर्ज किया गया।
यह रहा एक्यूआई
आनंद विहार 466
अलीपुर 476
अशोक विहार 473
आया नगर 457
बवाना 471
मथुरा रोड 473
चांदनी चौक 430
कर्णी सिंह शूटिंग रेंज 473
द्वारका सेक्टर आठ 467
एयरपोर्ट 451
दिलशाद गार्डन 467
जहांगीरपुरी 485
जेएलएन स्टेडियम 471
लोदी रोड 469
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम 443
मंदिर मार्ग 471
मुंडका 479
एनएसआईटी द्वारका 459
नजफगढ़ 461
नरेला 482
नेहरू नगर 479
पंजाबी बाग 479
पूसा 463
आरकेपुरम 442
रोहिणी 479
शादीपुर 424
सिरीफोर्ट 467
सोनिया विहार 486
श्री अरबिंदो मार्ग 468
विवेक विहार 483
वजीरपुर 476
एक्यूआई मानक और स्वास्थ्य पर प्रभाव
0 से 50- साफ
50 से 100-संतोषजनक (रोगियों को सांस की हल्की दिक्कत)
100 से 200-औसत (दिल, अस्थमा व फेफड़ों के मरीजों को सांस लेने में परेशानी)
200 से 300- खराब (अधिक समय तक संपर्क में रहने पर सांस संबंधी दिक्कत)
300 से 400-बहुत खराब (अधिक समय तक संपर्क में रहने पर सांस संबंधी बीमारियां होना)
400 से 500- गंभीर (स्वस्थ लोगों पर भी प्रभाव व मरीजों में गंभीर दुष्परिणाम)
500 से अधिक-आपातकालीन स्थिति (शरीर के अंगों पर गंभीर दुष्परिणाम)
बीते सात साल में पहली बार हवा इतने गंभीर स्तर पर पहुंची है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिल्ली समेत एनसीआर के सभी शहरों में 450 से ऊपर चला गया है। वहीं, दो साल बाद पीएम2.5 सबसे ज्यादा रिकार्ड किया गया। दिवाली की पटाखेबाजी शुरू होने के बाद पीएम2.5 मानक से आठ गुना 457 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक चला गया। इससे पहले एक बार यह 624 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर जा पहुंचा था।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) वर्ष 2015 से एक्यूआई माप रहा है। हर घंटे आंकड़ा देने के साथ सीपीसीबी रोज शाम 4 बजे 24 घंटे का औसत एक्यूआई जारी करता है। बीते सात साल में पहली बार दिल्ली और एनसीआर के सभी शहरों का एक्यूआई 450 से ऊपर रहा। दिवाली की पटाखेबाजी इसकी अहम वजह बताई जा रही है। पराली के धुएं ने भी इसमें भूमिका निभाई है।
सफर के परियोजना निदेशक डॉ. गुरफान बेग के मुताबिक, इस बार अधिक प्रदूषण के तीन प्रमुख कारण रहे हैं। पहला कि उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं अपने साथ पराली का धुआं भी ला रही हैं। पटाखों और स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण भी जिम्मेदार है। यही वजह है कि हवा खतरनाक श्रेणी में दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि वातावरण के साथ-साथ मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पीएम2.5 का स्तर 2018 के बाद इस वर्ष सबसे अधिक रहा है। पिछले वर्ष पीएम2.5 298 रहा था। अगले 24 घंटे के भीतर हवा में पीएम2.5 के स्तर में कमी हो सकती है, लेकिन यह बहुत खराब से लेकर गंभीर श्रेणी के आसपास रहेगा।
15 दिन पहले बिगड़ने लगे थे हालात
दिल्ली में 20 अक्तूबर के बाद से ही हवा बिगड़नी शुरू हो गई थी। अक्तूबर के अंत तक औसत से खराब श्रेणी के बीच दर्ज हो रही हवा पिछले पांच वर्ष में सबसे साफ हवा रही थी। दिल्ली सरकार ने 15 सितंबर को पटाखों की खरीद, उपयोग व बिक्री पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। इसके बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से 28 सितंबर को आदेश जारी कर एक जनवरी 2022 तक दिल्ली में पटाखों की खरीद, बिक्री, उपयोग व भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया था।
दिवाली के अगले दिन वर्ष 2015 से अब तक के आंकड़े
शहर 2021 2020 2019 2018 2017 2016 2015
दिल्ली 462 435 368 390 403 445 360
फरीदाबाद 469 414 358 455 --- 428 --
गाजियाबाद 470 448 396 422 412 -- ---
ग्रेटर नोएडा 464 417 375 410 --- --- ---
गुरुग्राम 472 425 372 389 397 298 ---
नोएडा 475 441 397 432 402 ---- ---
पिछले चार साल में पीएम2.5
2018 624
2019 377
2020 298
2021 457 (सुबह 10 बजे तक)