पंजाबी बाग स्थित दो निजी स्कूलों ने आर्थिक पिछड़े वर्ग के लगभग सौ छात्रों को स्कूल से बाहर कर दिया है। अभिभावकों को दिए गए पत्र में स्कूलों ने मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून का हवाला दिया है। दरअसल मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत आठवीं तक की शिक्षा निशुल्क है। पैरेंट्स का कहना है कि स्कूल ने अब तक आठवीं का रिजल्ट घोषित नहीं किया है।
स्कूल के इस फैसले के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में अभिभावक एकत्र हुए। वहां अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष अपराजिता गौतम के अनुसार स्कूल ने अचानक अभिभावकों को कह दिया कि बच्चे नौवीं में ईडब्लयूएस श्रेणी में नहीं पढ़ सकते। इसलिए या तो सामान्य वर्ग में दाखिला लो या पूरी फीस भरो। अन्यथा बच्चों की टीसी लेकर दूसरे स्कूल में दाखिला लो। अभिभावकों ने दिल्ली सरकार से इस संबंध में कुछ कदम उठाने की मांग की है।
अपराजिता गौतम ने कहा कि निजी स्कूलों से ईडब्ल्यूएस कैटेगरी से बच्चों को निकालने के और मामले भी सामने आ रहे हैं। उन्हों दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि ऐसे नियम कानून का निर्माण किया जाए या पुराने नियमों में बदलाव किया जाए जिससे आरटीई का हवाला देकर बच्चों को सड़क पर धकेला ना जा सके। हल ना निकलने तक बच्चों के नाम नहीं काटे जाएं और सामान्य रुप से पढ़ाया जाए।
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार और राजधानी के निजी स्कूलों के बीच एक लंबे समय से अधिकारों और व्यवहार को लेकर रस्साकशी चल रही है। केजरीवाल सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर बहुत हद तक अंकुश लगाया है। खास तौर से फीस और सालाना फीस के अलावा स्टेशनरी और यूनिफॉर्म इत्यादि को लेकर भी दिल्ली सरकार का रवैया निजी स्कूलों के प्रति बेहत सख्त है। आप के राज में निजी स्कूल खासी बंदिश महसूस कर रहे हैं।