हाईकोर्ट ने लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) में खराब हालात पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा चीजों को सही करने की जरूरत है। ये याचिका आशीष पांडेय नामक शख्स ने दायर कर ये आरोप लगाए गए हैं। याचिका पर सुनवाई 20 दिसंबर तय की गई है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर अस्पताल में सुधार के लिए कदम उठाने के लिए कहा। उन्होंने कहा आप मीडिया में आते हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि सब सही हो रहा है। उन्होंने कथित खामियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ये पहली बार नहीं है जब वे इस तरह की शिकायत सुन रही हैं।
न्यायमूर्ति ने कहा कि इनमें से कुछ आरोप सच हैं। मैं याची पर संदेह करना नहीं चाहती। वह दवाओं के व्यवसाय में नहीं है। यहां पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। कुछ सीमाएं हैं लेकिन आपको इन्हें सही करने की जरूरत है।
याची की ओर से अधिवक्ता आस्तिक गुप्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल को अस्पताल में दाखिल करते समय कोविड की जांच नहीं की गई। एक बिस्तर पर दो से तीन मरीज थे और तीन-तीन मरीजों को एक साथ अल्ट्रासाउंड के लिए ले जाया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि शव वहां पर 15-20 घंटे तक पड़े रहते थे जबकि मरीज फर्श पर लेटे हुए थे।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रत्येक वार्ड में करीब 72 बिस्तर हैं और वहां दो स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष डॉक्टर के साथ एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की तैनाती थी। इससे डॉक्टरों की कमी साफ दिखती है क्योंकि एक बिस्तर पर दो से तीन मरीज थे और इस तरह 250 से मरीजों की देखभाल के लिए केवल दो जूनियर डॉक्टर और एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर था।
याची ने कहा कि इस संबंध में प्रतिवेदन पर किसी ने जवाब नहीं दिया। उसने कहा कि वह सब कुछ सही करने के लिए नहीं कह रहा है लेकिन एलएनजेपी में बिल्कुल काम नहीं हो रहा है।
अदालत ने ये जानकारी सामने आने के बाद कहा कि हम अभी कोविड से बाहर नहीं निकले हैं। मंत्री रोजाना सावधानी बरतने के लिए कह रहे हैं। एलएनजेपी सरकार का एक तथाकथित गौरवशाली अस्पताल है, मैं यहां चीजों के सही होने की उम्मीद करती हूं।
दिल्ली सरकार के वकील अनुज अग्रवाल ने याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। याची ने अस्पताल में खामियों की जांच और निगरानी तथा सुधार के जरूरी कदम उठाने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी के गठन का निर्देश देने का आग्रह किया है।
याचिका में कहा गया है कि अस्पताल अधिकारियों का रवैये लापरवाहीपूर्ण है। वहां सुरक्षाकर्मियों के अभाव के कारण व्हील चेयर और स्ट्रेचर की जमानत के तौर पर तीमारदारों के मोबाइल फोन जमानत के तौर पर रखे जा रहे थे। हाईकोर्ट से अस्पताल के हालात पर संज्ञान लेने कहा आग्रह किया गया है क्योंकि वहां पर याची और सैकड़ों मरीजों के जीवन पर खतरा है।