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गणेश चतुर्थी आज : कोई ‘विघ्न’ न पड़े, इसलिए घरों में ही विराजेंगे ‘विनाशक’

Fri, 10 Sep 2021 03:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर बाजारों में मूर्तियों की जमकर हुई खरीदारी। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत 19 सितंबर तक चलेगा उत्सव, ईको फ्रेंडली मूर्ति की रही ज्यादा मांग। 
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ईको फ्रेंडली मूर्ति की रही ज्यादा मांग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी की बीच राजधानी में आज से गणेश महोत्सव शुरू हो रहा है। ईको फ्रेंडली मिट्टी से बनी गणपति बप्पा की मूर्तियों को आज श्रद्धा भाव के साथ घरों में स्थापित किया जाएगा। गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में बप्पा की मूर्तियों की खरीदारी को लेकर रौनक देखने को मिली।

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एक दिन पहले ही दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सार्वजनिक स्थलों पर पंडाल बनाने के साथ मूर्ति स्थापित करने पर रोक लगाई थी। इसके तहत पीतमपुरा के लाल बाग के राजा का भव्य दरबार भी इस बार नहीं लग रहा है। कोरोना महामारी के बीच लगातार दूसरी बार मूर्तियों की स्थापना घरों में की जाएगी। श्रद्धालुओं ने घरों में बप्पा के दरबार की विशेष तैयारियां की हैं। 

करोलबाग निवासी हिमानी ने बताया कि उन्होंने खुले स्थान पर पंडाल के बजाय घर में ही पंडाल बनाने का निर्णय लिया है। दरबार को रंग-बिरंगी लाइटों के साथ फूलों व पत्तियों से सजाया गया है। क्योंकि, घर में ही पंडाल बनाया जा रहा है तो इस बार भी मूर्ति की ऊंचाई तीन फीट तक ही रखी है।
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उन्होंने कहा कि पूरे 10 दिन तक बप्पा का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। प्रतिदिन भजन गायन के साथ पूजा-अर्चना होगी। पटेल नगर निवासी रौनक ने कहा कि बप्पा के स्वागत के लिए पिछले 10 दिन से तैयारियां चल रही हैं। पूजा आयोजन में इलाके की समिति भी शामिल है, लेकिन अंतिम समय में आदेश आने के बाद घरों में ही बप्पा की मूर्ति स्थापित करेंगे। हालांकि, इस दौरान घर में ही इलाके के लोग शारीरिक दूरी के साथ बप्पा की पूजा-अर्चना के लिए जुटेंगे। 

ईको फ्रेंडली मूर्ति की रही ज्यादा मांग
गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर बाजारों में बप्पा की ईको फ्रेंडली मूर्तियों की अधिक मांग रही। पूसा रोड स्थित दुकानदार राजेश सिंह ने बताया कि ईको फ्रेंडली मूर्ति बनाने वाली मिट्टी विशेष रूप से कोलकाता से मंगाई जाती है। इसकी खासियत है कि यह पानी को प्रदूषित नहीं करती है, जिससे वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है। पिछले वर्ष की तरह इस बार अधिकतम चार फीट तक ही बनी मूर्तियों की अधिक मांग रही है। इनकी कीमत 100 से 2500 रुपये तक है।

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