राजधानी के कई गांवों के किसानों को अघोषित बाढ़ जैसी आपदा में अवसर मिल गया। इन किसानों को मानसून के दौरान खेतों में पानी जमा होने पर फसल नष्ट होने पर नुकसान का सामना करना पड़ा था, लेकिन खेतों में जमा पानी में उगे कमल के फूल दिवाली के दिन खरीदने के लिए दुकानदारों के आने पर उनके नुकसान की कुछ भरपाई हो गई। दिवाली के दिन करीब एक दर्जन गांवों में फूल बेचने वाले दुकानदार किसानों के खेतों में कमल के फूल खरीदने पहुंचे। दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के दौरान लोग कमल के फूल का उपयोग करते है।
राजधानी में इस बार मानसून के दौरान रिकार्ड बारिश होने के कारण ग्रामीण इलाके में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे और खेतों में इतना पानी जमा हो गया कि किसानों की फसल नष्ट हो गई, वहीं नजफगढ़ के इलाके के समसपुर, उजाला, दरियापुर खुर्द, मलिकपुर, झुलझुली, सारंगपुर, गालिबपुर, रावता, दौराला आदि गांवों में खेतों में फसल नष्ट होने के बाद कमल के फूल उग गए थे। इन गांवों के खेतों में आज भी पानी भरा हुआ है। इस संबंध में अमर उजाला ने विस्तार से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से ये गांव सुर्खियों में आए हुए है।
उधर दिवाली के दिन फूल बेचने वाले दुकानदार इन गांवों के खेतों में कमल खरीदने के लिए पहुंचे। इस तरह किसानों ने अपने खेतों में उगे समस्त कमल के फूल बेच दिए। झुलझुली के किसान दीपक यादव ने बताया कि दुकानदारों ने उनके समक्ष 20 रुपये में कमल का एक फूल खरीदने का प्रस्ताव रखा। उनका यह प्रस्ताव सुनकर किसान खुश हो गए, क्योंकि उन्हें मालूम नहीं था कि उनके खेत में फसल नष्ट होने के बाद उगे कमल के फूलों से कुछ आय हो जाएगी।
मलिकपुर के किसान हरपाल डागर ने बताया कि उन्होंने दो हजार रुपये के फूल बेचे। उनकी तरह अन्य किसानों ने भी दो से तीन हजार रुपये के फूल बेचे है, वहीं दुकानदारों ने बाजार में कमल का एक फूल 50 रुपये में बेचा। दुकानदार महाबीर ने बताया कि वे गत वर्षों के दौरान फूल मंडी से 35 से 40 रुपये में फूल लेकर आते थे। इस बार उन्हें 20 रुपये में ही फूल मिल गया। लिहाजा किसानों की तरह उन्हें भी लाभ हो गया।