दिल्ली पुलिस ने सोमवार सुबह करीब नौ बजे राष्ट्रीय राजमार्ग -9 (दिल्ली से गाजियाबाद आने वाली लेन) को बंद कर दिया। इससे अभय खंड से वाया खोड़ा और गाजीपुर सर्विस रोड, दिल्ली आनंद विहार कौशांबी बॉर्डर, तुलसी निकेतन बॉर्डर पर वाहनों का दबाव बढ़ गया। जिसमें एंबुलेंस तक फंस गई। वाहनों का लंबा जाम लगने लोगों के पसीने छूट गए। हालांकि, इसकी सूचना ट्विटर और सोशल मीडिया प्लेटफार्म से ही लोगों को दी गई। सुबह 11.30 बजे एनएच खुलने के काफी देर बाद वाहन चालकों को राहत मिली।
पिछले दस महीने से यूपी गेट पर भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसान आंदोलन कर रहे हैं। इस वजह से गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाला रास्ता अभी तक बंद है। लेकिन दिल्ली से गाजियाबाद आने वाली लेन को 15 मार्च को खोल दिया गया था। इससे दिल्ली-यूपी के लोगों को बड़ी राहत मिली थी। मगर सोमवार सुबह अचानक रूट डायवर्ट होने की वजह से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई। इंदिरापुरम से अभय खंड और खोड़ा होते हुए गाजीपुर के रास्ते पर वाहनों का लंबा जाम लग गया। एनएच-9 पर भी वाहनों की लंबी कतार लग गई। इससे गाजियाबाद आने वाले लोगों के पसीने छूट गए।
दिल्ली से गाजियाबाद आने वाले वाहन चालकों को अचानक रोकने की सूचना से ट्रैफिक पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। ट्रैफिक पुलिस ने कौशांबी आंनद विहार बॉर्डर पर वाहनों का दबाव बढ़ने ने कर्मियों को तैनात कर दिया। वाहनों के जाम में एंबुलेंस भी फंसी रहीं। काफी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस को निकलवाया। वहीं, गाजियाबाद-दिल्ली में ऑफिस आने-जाने वाले लोगों के भी पसीने छूट गए। महिलाओं का बसों में सबसे बुरा हाल रहा। सुबह करीब 11:30 बजे दिल्ली की तरफ से एनएच -9 पर ट्रैफिक को खोल दिया गया।
मगर गाजियाबाद पुलिस ने बैरिकेड लगाकर वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी। तीन घंटे बाद वाहन चालकों को जाम से राहत मिली। ट्रैफिक इंस्पेक्टर योगेश पंत ने बताया कि दिल्ली की तरफ से गाजियाबाद आने वाला ट्रैफिक अचानक आनंद विहार कौशांबी की तरफ डायवर्ट कर दिया है। तीनों बॉर्डर पर पुलिसकर्मियों को तैनात कर वाहनों को निकलवाया गया। जहां भी जाम की सूचना मिली थी। वहां ट्रैफिक कर्मियों की मदद से जाम खुलवा दिया गया ।
यूपी गेट पर भाकियू ने सोमवार को लखीमपुर की घटना में मारे गए किसानों के लिए दो मिनट का मौन रखा। किसानों से शांति कायम रखने की अपील की। मंच से एक बार अपनी बात कहने के बाद संचालन बंद कर दिया गया। धरनास्थल पर खामोशी रही। किसानों की खामोशी से अफसर बेचैन दिखे। आंदोलन स्थल पर आईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी पवन कुमार, एसपी सिटी सेकेंड ज्ञानेंद्र सिंह, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी महीपाल सिंह, अभय कुमार मिश्रा और थाना प्रभारी सचिन मलिक मौजूद रहे। भाकियू के जिला अध्यक्ष चौधरी बिजेंद्र सिंह ने प्रदेश के 18 मंडलों से अपील की है कि किसान यूपी गेट पर आकर आंदोलन को मजबूती दें।
नाराज किसानों ने आंदोलन मंच के सामने हर-हर महादेव, अल्लाह हू अकबर, बोले सो निहाल सत, श्री अकाल जैसे धार्मिक उद्धोष के साथ मृतक किसानों के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। सुबह करीब नौ बजे यूपी गेट आंदोलन स्थल से कई किसान गाजियाबाद में कलक्ट्रेट का घेराव करने के लिए रवाना हो गए। सबसे पहले वह रहीसपुर में भाकियू पदाधिकारियों से मिले।
इसके बाद सभी एकत्रित हुए और कलक्ट्रेट के लिए कूच कर गए। इस बीच यूपी गेट पर भी बुजुर्ग और युवा किसानों के बीच माहौल गर्म हो गया। मंच के सामने बैठे आंदोलनकारी किसानों ने लखीमपुर घटना को लेकर सरकार की निंदा की। भाकियू का कहना है कि जब तक घायल और मृतक किसानों के परिजन सरकार की कार्रवाई से संतुष्टि नहीं होंगे। तब तक लड़ाई जारी रहेगी। भाकियू जिला अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे किसानों पर गाड़ी किसके इशारे पर चढ़ाई गई।