फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खास खबरः ‘आलमगीरनामा’ से दारा शिकोह की कब्र खोजने का दावा

Fri, 12 Feb 2021 06:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली

सार

  • मिर्जा काजिम की 1688 में फारसी में लिखी गई किताब की मदद से एसडीएमसी के सहायक अभियंता को मिली कामयाबी
विज्ञापन
दारा शिकोह की कब्र - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सदियों के बाद दारा शिकोह को पहचान मिली है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) की हेरिटेज सेल में सहायक अभियंता संजीव कुमार सिंह ने दारा शिकोह की कब्र खोजने का दावा किया है। इसका रास्ता उन्हें साल 1688 में मिर्जा काजिम द्वारा फारसी भाषा में लिखे गए ‘आलमगीरनामा’ ने दिखाया। इतने दिन तक इतिहासकारों की नजर इस पर नहीं गई थी।

विज्ञापन


संजीव ने बचपन में अमर चित्रकथा ‘दारा शिकोह और औरंगजेब’ पढ़ी थी। उन्हें तभी से दारा शिकोह में दिलचस्पी थी। आगरा से वे दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने आए तो अक्सर हुमायूं के मकबरे में जाया करते थे। वहां स्थित 140 से अधिक कब्रों को देखकर वे अक्सर सोचा करते कि इनमें से एक कब्र दारा शिकोह की है।

संजीव ने साल 1998 में एमसीडी में नौकरी शुरू की तो साथ में दारा शिकोह पर शोध का भी निर्णय लिया। मुगल बादशाह शाहजहां के चार पुत्र थे। उनमें औरंगजेब ने दारा शिकोह का कत्ल करा दिया था। संजीव ने दारा शिकोह को अधिक जानने के लिए इतिहास पढ़ने और समझने की कोशिश की। इतिहास के प्राथमिक स्रोतों का अध्ययन किया। ज्यादातर फारसी (दरी भाषा, जो अफगानिस्तान में बोली जाती है) में लिखे मध्यकाल के इतिहास का अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने बादशाहनामा, तबकात-ए-नासरी जैसी तमाम हिंदी में रूपांतरित किताबें पढ़ीं।
विज्ञापन


एएसआई की किताब से किया कब्र खोजने का फैसला
साल 1936 में आई एएसआई की एक किताब पढ़ने के बाद संजीव ने दारा शिकोह की कब्र का पता लगाने का फैसला किया। इस किताब में एक खास कब्र का जिक्र था, जो दारा शिकोह की हो सकती थी। इसी बीच मिर्जा काजिम का लिखा ‘आलमगीरनामा’ (औरंगजेब का 41 साल का इतिहास वर्ष 1688) और सालेह कंबोह की लिखी किताब ‘अमल-ए-सालेह’ का दिल्ली विश्वविद्यालय के फारसी विभागाध्यक्ष डॉ. अलीम अशरफ खान से अनुवाद करा अध्ययन किया। विदेशी यात्रियों के लिखे तथ्यों का भी अध्ययन किया।

इटली के यात्री मनूची ने लिखा है कि दारा शिकोह का धड़ दिल्ली में और सर आगरा में दफन किया गया। बर्नियर ने लिखा कि दारा शिकोह हुमायूं के मकबरे में दफ़न है। आलमगीरनामा कहता है कि गुंबद के नीचे बने तहखाने में हुमायूं की कब्र के समीप जहां बादशाह अकबर के बेटे मुराद और दानियाल दफन हैं, वहां दारा शिकोह को दफनाया गया है।

लाइन का वास्तविक अर्थ तलाशने में लगे ढाई सौ साल
संजीव कहते हैं कि हुमायूं के मकबरे के मुख्य गुंबद के नीचे पांच तहखानों में से केवल एक में तीन पुरुष एक साथ दफन हैं। इनमें से दो कब्रों का वास्तु समान है और वह अकबर कालीन है। तीसरी कब्र का वास्तु पहली दो कब्रों से अलग है और वह शाहजहां कालीन है। इसके अतिरिक्त मूल तहखाने में इनकी मूल सापेक्षिक स्थितियों की तुलना की जाए तो पता चलता है कि अकबर के दो पुत्रों दानियाल और मुराद की मौत दारा शिकोह से पहले हुई थी।

उनकी कब्रों को क्रमश: गुंबद के मध्य और दीवार की तरफ स्थान मिला है। दारा शिकोह की सबसे बाद में मौत हुई, उन्हें तहखाने के प्रवेश द्वार की तरफ दफनाया गया है। संजीव ने मई-जून 2020 में अपना शोध ‘दाराशिकोह की कब्र की खोज-एक अध्ययन’ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के समक्ष पेश किया है।

यह बोले इतिहासकार
संजीव के दावों को खारिज करने की कोई खास वजह नजर नहीं आती। मुझे लगता है कि जिस तरह के प्रमाण उन्होंने पेश किए हैं, वे साबित करते हैं कि दारा शिकोह की कब्र वहीं है।
- फरहत नसरीन, इतिहास विभागाध्यक्ष जामिया मिल्लिया इस्लामिया

कुछ इतिहासकार संजीव कुमार से सहमत नहीं हैं, लेकिन उनके तथ्यों को देखकर लगता है कि वे सही हैं। कला और स्थापत्य की दृष्टि से भी उनके तथ्य सही साबित हुए हैं। हमने अपनी रिपोर्ट एएसआई को सौंप दी है।
विज्ञापन

- बीआर मणि, दारा शिकोह की कब्र खोज पर एएसआई कमेटी के सदस्य।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें