एम्स ने सांसदों को इलाज के लिए वीवीआईपी सुविधा देने का फैसला किया है। इसके बाद सांसदों को ओपीडी, इमरजेंसी, एडमिशन व अन्य जगहों पर इलाज के लिए इंतजार नहीं करना होगा। इन्हें बेहतर सुविधा देने के लिए 24 घंटे एक नोडल अधिकारी तैनात रहेगा।
एम्स निदेशक डॉ एम श्रीनिवास की तरफ से एक पत्र जारी कर लोकसभा सचिवालय को बताया गया है कि एम्स में सांसदों के लिए वीआईपी व्यवस्था कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने एक डयूटी ऑफिसर नियुक्त किया है, जो इसका नोडल अधिकारी होगा। वह सांसदों के इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होगा। एम्स एमएस ऑफिस के ग्राउंड फ्लोर पर रूम नंबर 12 में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है।
विवादों में घिरी यह व्यवस्था यह व्यवस्था शुरु होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। लोगों का कहना है कि आम आदमी को अस्पताल में दाखिले के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ता है। सर्जरी के लिए तो सालों इंतजार करना होता है। ऐसे में सांसदों को वीवीआईपी सुविधा देना कहां का न्याय है। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन ने भी एम्स प्रशासन के इस फैसले की निंदा की है। संगठन ने टि्वट कर कहा है कि हम वीआईपी कल्चर की निंदा करते हैं।