देश की राजधानी में अब तक सामने आए ओमिक्रॉन मरीजों में ज्यादातर विदेशों से वैक्सीन लेने वाले हैं। जानकारी मिली है कि 10 में से छह मरीजों ने वैक्सीन की दोनों खुराक विदेशों में लगवाई हैं। इनमें बूस्टर खुराक वाले मरीज भी हैं, जिन्होंने दो के बाद तीसरी खुराक लेकर भी बचाव किया है। बहरहाल, यह सभी ओमिक्रॉन संक्रमण की चपेट में आने के बाद लोकनायक अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
अस्पताल ने अब तक भर्ती ओमिक्रॉन संक्रमित 52 मरीजों की जब केस हिस्ट्री पर आंतरिक अध्ययन किया तो उसकी रिपोर्ट में पता चला है कि 60 फीसदी मरीज फाइजर कंपनी की वैक्सीन ले चुके हैं, जिसे अब तक भारत में अनुमति नहीं मिल पाई है। दो बार आवेदन के बाद भी फाइजर कंपनी की वैक्सीन भारत के कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई थी।
इसके अलावा यह भी पता चला है कि बूस्टर खुराक लेने वाले मरीजों की हिस्ट्री भी फाइजर वैक्सीन से जुड़ी है। 30 फीसदी मरीजों ने संक्रमित होने से पहले कोविशील्ड की खुराक ली हैं, जबकि 10 फीसदी मरीजों में किसी ने भारत की पहली स्वदेशी कोवाक्सिन तो किसी ने जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन ली है। जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन भी भारतीय टीकाकरण में शामिल नहीं है। लोकनायक अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों में ज्यादातर विदेशों से टीकाकरण करवाने वाले हैं।
एक और बढ़ा बूस्टर खुराक वाला मरीज
जानकारी मिली है कि बूस्टर यानी वैक्सीन की तीसरी खुराक लेने के बाद ओमिक्रॉन संक्रमित होने वालों की संख्या और बढ़ी है। राजधानी में अभी तक ऐसे तीन मामले सामने आए थे, लेकिन लोकनायक अस्पताल के एक डॉक्टर का कहना है कि यह संख्या अब चार हो गई है। इन्होंने फाइजर कंपनी की ही बूस्टर खुराक ली थी।
फ्लाइट में बैठे हुए ही ओमिक्रॉन की चपेट में आए
डॉक्टरों ने इस पर हैरानी जताई कि ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों से जब केस हिस्ट्री के बारे में पूछा गया तो करीब 40 फीसदी से भी अधिक लोगों ने बताया कि जब उन्होंने फ्लाइट ली थी उस दौरान उनके पास आरटी-पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट थी, लेकिन किसी ने आठ तो किसी ने 16 घंटे की यात्रा करने के बाद जब दिल्ली हवाई अड्डे पर जांच कराई तो वह कोरोना संक्रमित मिले और बाद में उनमें ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि भी हुई। इनमें से किसी भी मरीज को यह नहीं पता था कि वह कोरोना संक्रमित भी हो सकते हैं। डॉक्टर ने कहा, अगर यह जांच न कराएं तो इन्हें कभी पता नहीं चलता और शायद कुछ दिन बाद ठीक भी हो जाते। हालांकि, इस बीच दूसरों के संक्रमित होने की आशंका जरूर बढ़ सकती थी।