इस सीजन में पहली बार दिल्ली-एनसीआर की हवा शुक्रवार को सबसे जहरीली दर्ज की गई। नोएडा और बुलंदशहर देश के सबसे प्रदूषित शहर रहे। दोनों शहरों को प्रदूषण स्तर 488 पर पहुंच गया है। वहीं, दिल्ली समेत एनसीआर के सभी शहरों की हवा भी खतरनाक स्तर के करीब पहुंची। इसमें चार कारक सबसे प्रभावी रहे। तापमान कम होने से मिक्सिंग हाइट एक किमी से भी नीचे पहुंच गई। वहीं, सतह पर चलने वाली हवाएं भी थमी सी रहीं। दोनों के मिले-जुले असर वेंटिलेशन इंडेक्स भी संकरा हो गया। इसके साथ ही पराली के धुएं ने भी गहरा असर डाला।
पराली के धुएं से भी बढ़ा प्रदूषण
गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर न निकलें
पूरे एनसीआर में एक्यूआई गंभीर श्रेणी का है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को घर से न निकलने की सलाह। सुबह-शाम सैर, जॉगिंग और एक्सरसाइज के लिए न जाएं। सुबह और देर शाम में दरवाजे और खिड़कियां न खोलें।
| कहां | कितना एक्यूआई |
| बुलंदशहर | 488 |
| नोएडा | 488 |
| गाजियाबाद | 486 |
| ग्रेटर नोएडा | 478 |
| दिल्ली | 471 |
सांस के मरीजों के साथ महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को ध्यान देने की जरूरत
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस दौरान लोगों को खुले में किसी तरह की गतिविधि नहीं करनी चाहिए। सांस के मरीजों के साथ महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को काफी ध्यान देने की जरूरत है।सीपीसीबी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, नोएडा व बुलंदशहर देश का सबसे प्रदूषित रहा। दोनों शहरों को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 488 रिकार्ड किया गया। वहीं, गाजियाबाद का सूचकांक 486 पर पहुंच गया। जबकि दिल्ली का सूचकांक 471 रहा। एनसीआर के दूसरे शहरों की हवा भी कमोवेश इसी स्तर तक खराब रही। इस सीजन में पहली बार दिल्ली समेत पूरे एनसीआर के लोग 450 से ऊपर की खराब हवा में सांस ले रहे हैं।
चार कारकों ने बिगाड़ी हवा
अगले दो दिनों तक हालात सुधरने के आसार नहीं
सफर का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों तक दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में कमी आने की संकेत नहीं है। दूसरे मौसमी कारकों के साथ तापमान कम होने से हवा की गुणवत्ता गंभीर और खतरनाक स्तर की सीमा रेखा पर बनी रहेगी। इस बीच 13 नवंबर की शाम से पड़ोसी राज्यों से आने वाली हवाओं की चाल कम होगी। फिर भी यह ज्यादा असरदार नहीं होगी।
दिल्ली व एनसीआर के सभी शहरों का सूचकांक 450 से ऊपर रहने का अंदेशा है। इसके बाद सहत पर चलने वाली हवाओं की चाल में मामूली तेजी आएगी। इससे प्रदूषक दूर तक फैल सकते हैं और प्रदूषण का स्तर नीचे गिरेगा। फिर भी, हवा की गुणवत्ता बेहद खराब और गंभीर स्तर की सीमा पर बनी रहेगी।