राजधानी दिल्ली की दमघोंटू हवा लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। शुक्रवार को गंभीर श्रेणी में पहुंचा एक्यूआई शनिवार सुबह कुछ कम तो हुआ, लेकिन अब भी गंभीर श्रेणी में ही बना हुआ है। आज सुबह आठ बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 468 दर्ज किया गया। 410 से 500 तक एक्यूआई को सीवीयर यानी गंभीर माना जाता है। शनिवार सुबह छह बजे तो यह 533 पहुंच गया था, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही इसमें गिरावट दर्ज की गई। वहीं, गाजियाबाद की हवा भी जानलेवा बनी हुई है। यहां सुबह आठ बजे एक्यूआई 468 दर्ज किया गया।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हवा की गति में तेजी आने के कारण अगले दो दिनों में प्रदूषण कम होने का अनुमान है। आसपास के क्षेत्रों में पराली जलने और प्रतिबंध के बावजूद दिवाली के मौके पर जमकर पटाखे फोड़ने के कारण इस बार दिल्ली की हवा पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा प्रदूषित रही।
विशेषज्ञों की मानें तो इस बार दिल्ली की हवा प्रदूषित होने के कई कारण हैं। मौसम की प्रतिकूल परिस्थिति के साथ ही तापमान में गिरावट, हवा की धीमी गति, पटाखे, पराली और अन्य छोटे-बड़े कारणों का नतीजा रहा कि वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।
वायु प्रदूषण से हर साल 15 लाख लोगों की मौत
पर्यावरणविद विमलेंदु झा बताते हैं कि वायु प्रदूषण से हर साल 15 लाख लोगों की मौत होती है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण के कारण अपनी जिंदगी के 9.5 साल खो देते हैं। लंग केयर फाउंडेशन का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण हर तीसरे बच्चे को अस्थमा होता है।
सड़कों पर किया जा रहा पानी का छिड़काव
दिल्ली में बढ़े प्रदूषण स्तर के बीच पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि एक आपात उपाय के रूप में, हमने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एंटी-स्मॉग पानी के टैंकों की मदद से सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू कर दिया है। हमने मानदंडों का उल्लंघन करने वाले 92 निर्माण स्थलों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।