दिल्ली मेट्रो की दो लाइनों की मेट्रो ट्रैक की निगरानी सेंसर करेगा। इससे मेट्रो ट्रैक पर होने वाली किसी खराबी का तत्काल पता लग जाएगा। ऑनलाइन इसकी जानकारी मिलने के बाद ट्रैक को कम समय में दुरुस्त किया जाएगा ताकि मेट्रो सेवाएं अधिक देर के लिए प्रभावित न हो।
नई प्रणाली के लागू होने से ट्रैक के निरीक्षण के लिए कर्मियों को न तो पूरे ट्रैक की सघन जांच करने की जरूरत होगी। पहचान होने के बाद न्यूनतम समय में खराबी को दुरुस्त भी किया जा सकेगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) येलो और ब्लू लाइन पर ट्रेन व्हील इंटरफेस मॉनिटरिंग (ट्रिविम) सिस्टम को लागू करने की दिशा में पहल की है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है।
हुडा सिटी सेंटर से समयपुर बादली के बीच येलो लाइन और ब्लू लाइन पर द्वारका सेक्टर-21 से वैशाली और नोएडा इलेक्ट्रिक सिटी के बीच सबसे पहले ट्रैक की सेहत का पता लगाने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ट्रैक की निगरानी के लिए नई प्रणाली के लागू होने से मेट्रो सेवा प्रभावित होने इन्हें जल्दी ठीक किया जा सकेगा। इससे लिए मैनुअल निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी और सेवा की गुणात्मकता भी बेहतर होगी। इससे भविष्य में ट्रेन के पहिये और ट्रैक के रखरखाव में भी सहूलियत होगी।
ऑप्टिकल निरीक्षण प्रणाली और सेंसर की मदद से ट्रैक की खराबी की आसानी से पहचान की जा सकेगी। इसे दूर करने के लिए खास सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा ताकि ट्रैक की समस्या की पहचान कर इसे दूर करने के लिए उचित कदम उठाए जा सके। शुरुआत में दो लाइनों पर इस प्रणाली की सफलता के बाद सभी मेट्रो लाइनों पर चरणों में इसे लागू किया जाएगा।