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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- लावारिस कुत्तों को भी भोजन का हक, लेकिन न हो किसी को परेशानी

Fri, 02 Jul 2021 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  

सार

  • जानवरों को कानून के तहत करुणा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार-हाईकोर्ट
  • स्ट्रीट डॉग्स एक क्षेत्रीय प्राणी, उसे भी भोजन का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार
  • कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट डॉग्स निभाते हैं गार्ड की भूमिका
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फाइल फोटो
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने कहा है कि जानवरों को कानून के तहत करुणा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। पशु एक आंतरिक मूल्य के साथ संवेदनशील प्राणी हैं। इसलिए ऐसे प्राणियों की सुरक्षा सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों सहित प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। अदालत ने यह टिप्पणी स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने और उनके इलाज के लिए दिशा-निर्देशों जारी करते हुए की। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक कुत्ता एक क्षेत्रीय प्राणी है। स्ट्रीट डॉग्स को भोजन का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार है।

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न्यायमूर्ति जेआर मिढ़डा ने अपने 87 पृष्ठों के फैसले में कहा कि सामुदायिक कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) को भोजन खिलाने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग करने में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह अन्य व्यक्तियों या समाज के दूसरों सदस्यों को नुकसान, बाधा, उत्पीड़न के माध्यम से उनके अधिकारों का उल्लंघन न हो।

अदालत ने कहा प्रत्येक कुत्ता एक क्षेत्रीय प्राणी है और इसलिए कॉलोनी के कुत्तों को उनके क्षेत्र के भीतर उन स्थानों पर खिलाया जाना चाहिए और उनकी देखभाल की जानी चाहिए, जहां लोग कम आते जाते हैं और आम जनता और निवासियों द्वारा संयम से उपयोग किए जाते हैं।
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अदालत ने निर्देश दिया है कि कुत्तों को रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या नगर निगम के परामर्श से एडब्ल्यूबीआई द्वारा निर्दिष्ट क्षेत्रों में खाना खिलाया जाना चाहिए। 
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे निकायों को इस तथ्य के प्रति सचेत रहना होगा कि ये क्षेत्रीय कुत्ते हैं। यह एडब्ल्यूबीआई और रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कर्तव्य है कि वे इस तथ्य को सुनिश्चित करें और ध्यान रखें कि समुदाय कुत्ते समूह में रहते हैं और एडब्ल्यूबीआई और आरडब्ल्यूए द्वारा इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक समूह में आदर्श रूप से खिलाने के लिए अलग-अलग निर्दिष्ट क्षेत्र हों, भले ही इसका मतलब किसी इलाके में कई क्षेत्रों को निर्दिष्ट करना हो।

कुत्तों को खिलाने में उत्पीडन न हो
अदालत ने कहा सभी कानून प्रवर्तक अथारिटी यह सुनिश्चित करें कि निर्दिष्ट भोजन स्थल पर स्ट्रीट डॉग को खिलाने में कोई उत्पीड़न या बाधा न हो।

अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दूसरे को कुत्तों को खाना खिलाने से प्रतिबंधित नहीं कर सकता है, जब तक कि यह उस अन्य व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है। 

कुत्तों की नसबंदी व उनकी देखभाल जरूरी
अदालत ने कहा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कर उसी क्षेत्र में वापस लौटाना होगा। यदि कुत्तों में से कोई भी घायल या अस्वस्थ है तो यह आरडब्ल्यूए का कर्तव्य होगा कि वह ऐसे कुत्ते के लिए नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए पशु चिकित्सक और या निजी तौर पर आरडब्ल्यूए के फंड से इलाज करवाए।

स्ट्रीट डॉग्स निभाते है गार्ड की भूमिका
अदालत ने कहा हमारे समुदाय में गली के कुत्तों का बहुत महत्व है। क्षेत्रीय जानवर होने के नाते, वे कुछ क्षेत्रों में रहते हैं और बाहरी लोगों या अज्ञात लोगों के प्रवेश से समुदाय की रक्षा करके गार्ड की भूमिका निभाते हैं। यदि इन्हें एक निश्चित स्थान से हटा दिया जाता है तो नए आवारा कुत्ते उनकी जगह लेंगे।

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  डिफेंस कॉलोनी में कुत्ते को तीसरी मंजिल से फेंका, मौत 

दिल्ली की पॉश कॉलोनी डिफेंस कॉलोनी में कुत्ते को तीसरी मंजिल से फेंक कर मारने का मामला सामने आया है। स्ट्रीट डॉग की मौत को लेकर एनिमल एक्टिविस्ट(पशु प्रेमी) ने काफी देर तक हंगामा व नारेबाजी की। एनिमल एक्टिविस्ट ने करने को फेंककर मारने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस की शुरूआती जांच में ये बात सामने आ रही है कि कुत्ता खुद ही गिरा है। डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस ने एनिमल एक्टिविस्ट मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस कॉलोनी की सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। 

दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों हुडको पैलेस में सीनियर अफसरों के टाइप-चार, व पांच के ट्रांजिट फ्लैट्स हैं। यहां तैनात सिक्यूरिटी गार्ड दिनेश कुमार ने बताया कि बुधवार रात करीब दो उसने कुछ गिरने की आवाज सुनी। उसने पास जाकर देखा तो कुत्ता खून से लथपथ पड़ा था। उसकी मौत हो चुकी थी। कुत्ते की मौत की खबर सुनकर अगले दिन एनिमल एक्टिविस्ट ज्योति अरोड़ा अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंच गई और काफी देर तक हंगामा किया। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। ज्योति आरोड़ा की शिकायत पर पुलिस कुत्ते को मारने का मामला दर्ज कर लिया है। 

ज्योति अरोड़ा का कहना है कि वह मरने वाले कुत्ते समेत अन्य कुत्तों को खाना खिलाती थी।  उसने आरोप लगाया है कि पहले भी एक कुत्ते को छत से फेंका गया था। इलाज कराने के कारण कुत्ता बच गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर कुत्ते को फेंका जाता तो वह दीवार से दूर गिरता, जबकि कुत्ते का मरा हुआ दीवार के पास पड़ा हुआ था। जांच के बाद ही सच सामने आएगा। 
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