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हाईकोर्ट की टिप्पणी: सिस्टम यौन अपराध मिटा नहीं सकता... मदद तो करे

Thu, 27 May 2021 06:59 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने ये आदेश निचली अदालत के उस आदेश को खारिज करते हुए दिया है जिसमें बच्चे को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया थ। हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाते हुए कहा कि उक्त मुआवजा कम था बल्कि न्यूनतम था। 
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delhi high court - फोटो : PTI
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने यौन शोषण के मामले में छह साल के पीड़ित बच्चे को छह लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता लेकिन आरोपी पर मुकदमा चलाने के साथ ही पीड़ित को वित्तीय सहायता देकर उसकी मनोवैज्ञानिक तौर पर सुरक्षा दी जा सकती है।

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हाईकोर्ट ने ये आदेश निचली अदालत के उस आदेश को खारिज करते हुए दिया है जिसमें बच्चे को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया थ। हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाते हुए कहा कि उक्त मुआवजा कम था बल्कि न्यूनतम था। 

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा पीड़ित को अंतरिम मुआवजा राशि तय करते हुए अदालत का प्रयास संभव अधिकतम वित्तीय सहायता देना होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर गौर किया कि बच्चे को शारीरिक व मानसिक आघात लगा। इससे जुड़ी यादें हमेशा उसके जेहन में रहेंगी। जो घटना हुई उसे नहीं बदला जा सकता है लेकिन पीड़ित को मुआवजा तो दिया जा सकता है।
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पेश मामले में छह साल के बच्चे के साथ उसके अंकल ने उसके ही घर में 2020 में यौन शोषण, अप्राकृति यौनाचार किया था। इस मामले में मुकदमा चल रहा है। पीड़ित बच्चे की ओर से अधिवक्ता प्रभसहाय कौर ने कहा कि पीड़ित बेहद गरीब परिवार से है। उसकी मां घरों में काम करती है और उसका पिता बीमार है। चार सदस्यों के परिवार की कुल आय केवल छह हजार रुपये हैं। 

हाईकोर्ट ने कहा कि इसे आसानी से देखा जा सकता है कि इहबास में बच्चे की महंगी काउंसलिंग और उपचार के खर्च के अलावा भी उसके परिजनों के पास उसे वापस सके पुराने स्कूल भेजने या किसी अन्य स्कूल में भेजने की व्यवस्था के लिए भी पैसा होना चाहिए। 

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