हाईकोर्ट ने बताया कि संबंधित जिला अधिकारी इस कमेटी का चेयरपर्सन होगा और स्थानीय जिला अधिकारी, पुलिस उपायुक्त (महिला सेल), जिला विधि सेवा प्राधिकरण का सचिव, दिल्ली महिला आयोग द्वारा नामित व्यक्ति और जिले की महिला एवं बाल विकाल विभाग का अधिकारी इसके सदस्य होंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि संस्थान अपने धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाकलाप करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।
कोर्ट ने कहा था कि इसे दिल्ली सरकार के अंतर्गत कर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कमेटी से मासिक रिपोर्ट भी मांगी थी और कहा था कि इसके संचालन के लिए सरकार जरूरी सहयोग प्रदान कराएगी।
इसके बाद दिल्ली सरकार के वकील संतोष त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया था कि निजी संस्थान के संचालन के लिए सरकार के पास कोई तंत्र नहीं है। उन्होंने कोर्ट से आश्रम के क्रियाकलापों की निगरानी के लिए कमेटी गठित करने का आग्रह किया था।