अदालत के सवाल पर अधिवक्ता जॉन ने कहा वे शुक्रवार को इसका जवाब देने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपनी दलील में कहा वैवाहिक साथी के 'ना' का अवश्य ही सम्मान किया जाना चाहिए। दुष्कर्म खुद में एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि अपवाद-दो के तहत दी गई सुरक्षा अपवाद की प्रकृति में नहीं है बल्कि एक छूट है।
ऐसे में अपवाद दो को धारा से हटाया जाए। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया। आईपीसी की धारा 375 में दिए गए अपवाद के तहत एक पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग या यौन कृत्य पत्नी की उम्र पंद्रह वर्ष से कम नहीं है तो दुष्कर्म नहीं है।