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दिल्ली हाईकोर्ट: विदाई समारोह में मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल बोले- जज का सरकार के पक्ष या विपक्ष में होना गलत नहीं

Sat, 12 Mar 2022 02:55 AM IST
सुशील कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली

सार

न्यायाधीश पटेल ने कहा कि कानून बनाना संसद का काम है और कानून की अनुपस्थिति में कार्यपालिका के लिए नीति का मसौदा तैयार करना है। न्यायिक सक्रियता और संयम के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
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दिल्ली हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे जस्टिस विपिन सांघी, लेंगे जस्टिस डीएन पटेल की जगह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि जज का सरकार के पक्ष या विपक्ष में होना गलत नहीं है, क्योंकि उनके समक्ष जो मुद्दे लाए जाते हैं, उन्हें देखने का हर किसी का अलग-अलग नजरिया और विचार हो सकते हैं। पटेल शुक्रवार को अपने विदाई समारोह में संबोधित कर रहे थे। वे 13 मार्च को सेवानिवृत्त रहे हैं।

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जस्टिस पटेल ने कहा कि कुछ जज श्रमिकों, नियोक्ताओं और सरकार के पक्ष में भी हो सकते हैं और विपक्ष में भी। इसमें कुछ गलत नहीं है। आप देखते हैं कि लोग इसकी आलोचना भी करते हैं। इसमें जरा भी गलत नहीं है कि आप भूमि मालिक, किरायेदार और नियोक्ता के पक्ष में हैं या विपक्ष में। ऐसे निर्णय हमेशा ही कानून की व्याख्या करते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश केवल दुभाषिए हैं कानून या नीति बनाने के लिए नहीं है। न्यायिक सक्रियता और संयम के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। 

न्यायाधीश पटेल ने कहा कि कानून बनाना संसद का काम है और कानून की अनुपस्थिति में कार्यपालिका के लिए नीति का मसौदा तैयार करना है। न्यायिक सक्रियता और संयम के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। न्याय और कानून के बीच कोई अंतराल है तो एक न्यायाधीश को उस अंतर को भरना होगा और इसे न्यायिक सक्रियता के रूप में जाना जाता है। यह अपरिहार्य है, लेकिन अपवाद के रूप में और भूमिका की बात के रूप में नहीं।
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उन्होंने कहा कि हम कानून के एकमात्र व्याख्याकार हैं। जब भी कानून और न्याय के बीच अंतर होता है तो न्यायिक सक्रियता होना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायाधीशों का प्राथमिक कार्य न्यायिक आदेशों के माध्यम से न्याय प्रदान करना है और बार-बेंच दोनों के सदस्यों का नागरिकों के प्रति उत्तरदायित्व है। हम में से प्रत्येक को कतार के आखिरी आदमी को न्याय देने के लिए संविधान के जनादेश से बाध्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय में बार की गुणवत्ता सर्वोत्कृष्ट है। उन्होंने महामारी के दौरान न्यायिक प्रणाली को चालू रखने के लिए दिल्ली न्यायपालिका के सदस्यों द्वारा किए महत्वपूर्ण प्रयासों को स्वीकार किया। 

समारोह के दौरान न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने कहा कि न्यायमूर्ति पटेल के गतिशील दृष्टिकोण के कारण ही संभव हुआ कि दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष वर्चुअल सुनवाई और हाइब्रिड सुनवाई की अन्य उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सराहना की गई थी।

जस्टिस विपिन सांघी 13 को संभालेंगे  कार्यभार
जस्टिस विपिन सांघी 13 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे। केंद्रीय कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने शुक्रवार को जस्टिस सांघी की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। संविधान के अनुच्छेद-223 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस विपिन सांघी को मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया है। जस्टिस सांघी का जन्म 27 अक्तूबर 1961 को नागपुर में हुआ था। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी गणित (ऑनर्स) में स्नातक करने के बाद वर्ष 1983 में उन्होंने कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय में एलएलबी में दाखिला लिया। कानून की डिग्री लेने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की। दिसंबर, 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उन्हें वरिष्ठ वकील नामित किया गया था। सांघी को 29 मई, 2006 से दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 11 फरवरी, 2008 को वह स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गए।

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