जानबूझकर दिया गया धोखा
अदालत ने पुलिस के तर्क को खारिज करते हुए याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों निदेशकों का शुरुआत से ही याची अहमद को धोखा देने का इरादा था क्योंकि वे इस बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे पाए कि राशि प्राप्त होने के बावजूद याची को कोई सेवाएं क्यों नहीं दी गईं।
सक्षम अधिकारी से अनुमति भी नहीं ली थी
अदालत ने कहा कि इसके अलावा आरोपी यह भी स्पष्ट कर पाए है कि उन्होंने याची को संबंधित समय पर हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अपेक्षित अनुमति प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि ठगी गई राशि की वसूली के लिए पुलिस द्वारा जांच की आवश्यकता होगी यह पता लगाने के लिए कि क्या आरोपी के पास उनके द्वारा किए गए वादे के अनुसार और प्रभावी जांच के लिए सेवाएं प्रदान करने की अपेक्षित अनुमति थी। उन्होंने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि याचिका स्वीकार करने का ठोस आधार है। अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को दोनों निदेशकों के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है।
अपने कर्मचारी को भी दिया धोखा
अदालत ने कंपनी के कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने से इंकार करते हुए कहा कि चार्टर सर्विस कंपनी के कर्मचारी को किसी आपराधिक दायित्व के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि निदेशकों ने उसे भी धोखा दिया था। इतना ही नहीं आरोपी निदेशकों ने कर्मचारी को पिछले छह महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया है। अदालत ने पुलिस को इसकी भी जांच करने का निर्देश दिया है।