हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद द्वारा दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई 23 मई तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने कहा वह इस दिन से विशेष पीठ के रूप में दैनिक आधार पर सुनवाई करेगी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर के समक्ष मामले की सुनवाई तय थी। अदालत ने 23 मई से नियमित सुनवाई करने का निर्णय किया है।
नवीनतम रोस्टर के अनुसार, न्यायमूर्ति मृदुल और न्यायमूर्ति भटनागर वर्तमान में अलग-अलग बैठ रहे हैं। हालांकि, चूंकि यह जमानत याचिका आंशिक रूप से उनके द्वारा सुनी गई थी वे शुक्रवार को विशेष रूप से एक साथ बैठे।
खालिद के मामले की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति मृदुल ने कहा था कि अमरावती में उन्होंने जो भाषण दिया वह अप्रिय था और सरकार की आलोचना की अनुमति है लेकिन एक लक्ष्मण रेखा को पार नहीं किया जाना चाहिए।
पीठ ने यह भी सवाल किया था कि उमर खालिद का क्या मतलब था जब उन्होंने अमरावती में दिए गए भाषण में ॐइंकलाबॐ और ॐक्रांतिकारीॐ शब्दों का इस्तेमाल किया था।
आज सुनवाई के दौरान खालिद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने शब्दों के अर्थ को समझाने के लिए भाषण की प्रतिलेख और दस्तावेजों की एक प्रति पेश की। उन्होंने चार्जशीट के कुछ हिस्सों को भी दिखाना शुरू कर दिया, जिसमें अभियोजन पक्ष के आरोपों की ओर इशारा किया गया था कि खालिद आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।
आज मामले की सुनवाई के बाद विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने पीठ को सूचित किया कि उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने के लिए चार से पांच घंटे और चाहिए।इसके बाद बेंच ने फैसला किया कि वे 23 मई से हर दिन दोपहर के बाद बैठेंगे और जमानत याचिका पर सुनवाई करेंगे। हम इसे छुट्टी से पहले समाप्त करना चाहते हैं।
24 मार्च को कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार करने के बाद खालिद ने उच्च न्यायालय का रुख किया।