जांच में पता चला था कि महिला के भ्रूण में एक जन्मजात विसंगति है जिसके कारण पैदा होने के बाद उसे मनोवैज्ञानिक नुकसान होने की संभावना है। इसके बाद अदालत ने चिकित्सकीय रूप से उसे समाप्त करने की अनुमति दी है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 सप्ताह की एक गर्भवती महिला को गर्भपात की अनुमति दे दी है। दरअसल जांच में पता चला था कि महिला के भ्रूण में एक जन्मजात विसंगति है जिसके कारण पैदा होने के बाद उसे मनोवैज्ञानिक नुकसान होने की संभावना है। इसके बाद अदालत ने चिकित्सकीय रूप से उसे समाप्त करने की अनुमति दी है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि 31 वर्षीय याचिकाकर्ता की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि बच्चा विभिन्न शारीरिक विकृति से पीड़ित होगा और उसे कई सर्जरी की आवश्यकता होगी जिसके कारण उसे कई इंट्रा-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं से होकर गुजरना पड़ेगा। इससे उसके जीवन की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।