नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने एनसीआर क्षेत्र में रहने वाले वकीलों को भी सीएम एडवोकेट्स वेलफेयर स्कीम के तहत लाभ देने संबंधी सिंगल जज के फैसले को चुनौती दी है। सिंगल जज ने कहा था कि जो वकील दिल्ली में प्रैक्टिस करते हैं, उन्हें इस स्कीम का लाभ देना होगा। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली बार काउंसिल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई 30 सितंबर तय की है। दिल्ली सरकार ने अपील में तर्क दिया कि इस योजना के तहत किस श्रेणी के वकील लाभ के पात्र हैं, यह नीति का मुद्दा है। इसके अलावा सरकार की कोई वैधानिक बाध्यता नहीं है। इसलिए इस मामले में किसी याचिका पर फैसला नहीं हो सकता।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नैयर ने कहा कि सिंगल जज का आदेश बहुत अजीब है क्योंकि यह दिल्ली सरकार को स्कीम का लाभ अन्य राज्यों तक पहुंचाने के लिए बाध्य करता है।
उन्होंने कहा हमने दिल्ली में वकीलों के लिए कल्याणकारी योजना शुरू की। हमें कहा जा रहा है कि इसे एनसीआर में लागू किया जाए? उन्होंने कहा इसे केरल, तमिलनाडु के वकीलों तक क्यों नहीं पहुंचाया जाता? उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार राजधानी क्षेत्र के लिए योजना को लागू करने की इच्छुक है।
दिल्ली बार काउंसिल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कहा कि नोएडा और गुड़गांव जैसे एनसीआर क्षेत्र के वकीलों को दिल्ली में प्रैक्टिस करने का अधिकार है। हालांकि तमिलनाडु और अन्य राज्यों के वकील नहीं हैं, इसलिए यह उनका मामला है। उन्होंने कहा कि सिंगल जज के आदेश में कोई अनियमितता नहीं है।
उन्होंने अदालत को बताया कि सिंगल जज ने दिल्ली सरकार से सहायता राशि बढ़ाने को नहीं कहा है। इतनी ही राशि पात्र वकीलों के बीच वितरित की जानी है। इस तरह दिल्ली सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं है।
दिल्ली सरकार ने 50 करोड़ रुपये की वार्षिक राशि के साथ अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए एक योजना शुरू की। यही कारण है कि दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ताओं को सुविधा प्रदान की गई है इनमें से काफी दिल्ली की मतदाता सूची में भी हैं।