आवारा कुत्तों से परेशान लोग, एक दिन में आईं 50 शिकायतें
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बहुत सोच समझ के सोसायटी में रहने आया था। अच्छा जीवन जीएंगे। बेटियां महफूज रहेंगी। लेकिन सोसायटी के आवारा कुत्तों ने जीना बेहाल कर दिया है। अस्पताल दर अस्पताल भटकना पड़ रहा है। कुत्तों के काटने का इंजेक्शन तो मिल जाता है, लेकिन जानवर के काटने व स्टेज थ्री होने से सीरम की जरूरत होती है। यह 24 घंटे सिर्फ हिंदूराव अस्पताल व आरएमएल में ही मिलता है।
यह दर्द ना केवल प्रो. अभय कुमार का है, जो छह साल की दर्द से कराहती हुई बेटी को लेकर बृहस्पतिवार की रात निजी व सरकारी अस्पताल भटकते रहे, बल्कि मुखर्जी नगर के एसएफएस सोसायटी में रहने वाले कई माता-पिता की है। बच्चे ही नहीं वरिष्ठ नागरिक भी सैर करने से कतराते है। आरडब्ल्यूए भी जानवर प्रेमी की वजह से कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं है। अभय की छह साल की मासूम बेटी को आरडब्ल्यूए के अंदर ही पर्क नाम के एक कुत्ते ने काट लिया है। दिनभर में 50 से ज्यादा लोगों ने कुत्ते के काटने की शिकायत की है।
बेटियों को कुत्ते से बचाव अभियान चलाया
परेशान लोग बेटियों को कुत्ते से बचाने का अभियान चला रहे है। एमसीडी में शिकायत, आरडब्ल्यूए की बैठक, कानूनी सलाह ले रहे है। शिकायत में कहा जा रहा है कि सोसायटी का एक बड़ा तबका जिसमें बच्चे व बुजुर्ग शामिल हैं, भयभीत है। आरडब्ल्यूए के कानूनी अधिकार खंगाल रहे हैं।
एमसीडी से शिकायत में क्या मिल रहा है जवाब
समस्या के लिए एमसीडी ने 155304 नंबर जारी किया है। एक दर्जन से अधिक लोगों ने शिकायत दर्ज की है। अमर उजाला ने जब पूछा कि समस्या का निदान क्या है। तो जवाब मिला कि कुत्तों को हटाने का प्रावधान नहीं है। स्थानीय एमसीडी कार्यालय में शिकायत देनी होगी।
क्या कहते हैं आम लोग
प्रतिदिन कुत्ते किसी ना किसी बच्चे या सहायिकाओं को काट रहे है। इस तरह की घटनाए बढ़ती जा रही हैं। ना तो बच्चे और ना ही बुजुर्ग सुरक्षित हैं। आरडब्ल्यूए भी कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रह है। क्योंकि जानवर प्रेमी ऐसा होने नहीं देते।
डॉ. शिखा राय, स्थानीय निवासी
पिछले कई सालों से यह समस्या है। बच्चे व बुजुर्ग ना तो पार्क में सुरक्षित महसूस करते हैं और ना ही सोसायटी की सड़कों पर। कानूनी सहायता लेकर इस परेशानी से निजात दिलाएंगे। एमसीडी में प्रशासनिक अधिकारियों से इस बाबत संपर्क में लगातार बने हुए है। ज्यादातर लोग चाहते है कि काटने वाले कुत्तों से निजात मिले।
प्रो. चंद्रचूर सिंह, सचिव वेलफेयर एसोसिएशन
हर दिन इस तरह की समस्या आती है। बच्चों को ना तो साथ में लेकर सैर कर सकते हैं ना ही पार्क में ले जा सकते हैं। वरिष्ठ नागरिक सैर के लिए नहीं निकल पाते। प्रशासन को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। कुत्तों वाली सोसायटी के नाम से मशहूर हो गया है।
मधुलिका गुप्ता, निवासी