दिल्ली विधानसभा ने शोध केंद्र के माध्यम से नियुक्त किए गए 116 फेलो को हटाने के आदेश को स्थगित करवा दिया है। इसे लेकर बृहस्पतिवार को एक और आदेश जारी किया गया। दिल्ली विधान सभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि पहला आदेश उनकी मंजूरी के बिना जारी किया गया था और इसकी जानकारी मिलते ही वह विधानसभा पहुंचे।
उन्होंने कहा कि अध्येता नियमित कर्मचारी नहीं हैं बल्कि दो साल के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त प्रशिक्षु थे। दिल्ली विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति से हरी झंडी दिए जाने और सदन द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद वे इसमें शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अगर वित्त सचिव ने एलजी की मंजूरी के लिए फाइल नहीं भेजी तो यह उनकी गलती है।
गोयल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय आदेश के खिलाफ अलग से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वहीं वित्त विभाग ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर हटाए गए दिल्ली सरकार में काम कर रहे अध्येताओं, सहयोगी अध्येताओं, सलाहकारों, उप सलाहकारों, विशेषज्ञों, वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारियों के वेतन को रोकने का आदेश जारी किया। इससे पहले सेवा विभाग ने भी वेतन रोकने से संबंधित आदेश एक दिन पहले जारी किया गया था।
इन विशेषज्ञों को हटाए जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यह कदम राजधानी में शासन को पूरी तरह से बाधित कर देगा। यह दिल्ली सरकार और उसकी सेवाओं का पूरी तरह से गला घोंट देगा। मुझे नहीं पता कि एलजी को यह सब करके क्या हासिल होगा। मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे तुरंत रद्द कर देगा।
सेवा विभाग के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विभाग के कुछ अधिकारी इस मुद्दे पर फाइलें आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन प्रभारी मंत्री होने के बावजूद उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि आज तक भी, मुझे इस विषय पर कोई फाइल नहीं मिली है। कुछ चुनिंदा अधिकारी और उपराज्यपाल मिलकर न केवल सरकार चला रहे हैं। बल्कि वे सरकार के काम को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। भारद्वाज ने कहा कि युवा पेशेवरों को बिना कोई नोटिस दिए हटाया जा रहा है जो कतई सही नहीं।
वित्त विभाग ने रोका 437 विशेषज्ञों का वेतन
दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने विभिन्न विभागों व अन्य संस्थाओं में काम कर रहे 437 विशेषज्ञों के वेतन को रोकने का आदेश जारी किया है। एक दिन पहले ही सेवा विभाग ने इनके वेतन को रोकने का आदेश दिया था। इससे पहले उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बिना स्वीकृति के रखे गए दिल्ली सरकार में सलाहकार, परामर्शदाता, सीनियर रिसर्च फैलो, विशेषज्ञ व अन्य पदों पर काम कर रहे 437 लोगों को पदों से हटा दिया था।
इनकी नियुक्ति रोके जाने के बाद वित्त विभाग ने तुरंत वेतन को रोकने का आदेश दिया है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि यदि कोई प्रशासनिक विभाग इन्हें जारी रखना चाहता है तो तुरंत नियम के तहत उपराज्यपाल को आवेदन देकर मंजूरी ले सकता है।