शिकायतकर्ताओं ने वसुंधरा समूह के खिलाफ आरोप लगाया कि समूह और उसके निदेशकों चंद्र प्रकाश सैनी, उसकी पत्नी सुनीता सैनी और अन्य ने लोगों को दैनिक बचत खाता, सावधि जमा खाता और अन्य आकर्षक निवेश योजनाओं को खोलने के लिए आकर्षित किया। आरोपियों ने निवेशकों के खाते खोले, प्रमाण पत्र और पासबुक जारी किए। करीब 700 लोगों से रुपये जमा करवाए गए। उसके बाद आरोपी निवेश किए गए चार करोड़ रुपये लेकर भाग गए।
आरोपी कंपनियों ने बिना पंजीकरण एनबीएफसी के रूप में किया काम
शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच से पता चला कि वसुंधरा फिनटेक लिमिटेड और अनाकाया निधि लिमिटेड (आरोपी कंपनियां) और उसके निदेशकों ने निश्चित रिटर्न के वादे कर पीड़ितों से धन जमा किए। आरोपी कंपनियों ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (एनबीएफसी) के रूप में काम किया। जबकि कंपनी आरबीआई के साथ एनबीएफसी के रूप में पंजीकृत नही थीं। वह निवेशकों से राशि नहीं ले सकती थीं।
छह माह से फरार थे आरोपी
पीड़ितों को उनके निवेश के खिलाफ प्रमाण पत्र, पासबुक आदि जारी किए गए और उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनका पैसा सुरक्षित है। पीड़ितों को आकर्षक रिटर्न और केवल चार साल में निवेश की गई राशि को दोगुना करने जैसे आकर्षक प्रस्तावों से आकर्षित किया गया। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। आरोपी पिछले छह माह से फरार थे। कई संदिग्ध नंबरों पर तकनीकी निगरानी की गई। जांच के दौरान पुलिस को उनके फेसबुक खातों से सूरत, गुजरात में आरोपी के ठिकाने का पता लगा।
पुलिस टीम ने गुरुवार को सूरत में छापा मारकर सुनीता सैनी को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि सुनीता कंपनी की निदेशक और शेयर होल्डर है। वह ईएलएलआईएम विश्वविद्यालय सिक्किम से स्नातकोत्तर कर चुकी है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर जांच में जुटी है।