ट्रेड फेयर शनिवार से आम लोगों के लिए खुल जाएगा। देशभर के विभिन्न राज्यों और करीब सभी जिलों से आए देशी सामान मेले में बेहद खास हैं। आम लोगों को मेले में सुबह 10 बजे से शाम को 7.30 बजे तक प्रवेश मिलेगा। गेट नंबर चार और 10 से एंट्री मिलेगी। वहीं आखिरी दिन 27 नवम्बर को शाम को 4.30 बजे एंट्री बंद कर दी जाएगी।
आईटीपीओ प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि 14-18 नवंबर तक बिजनेस डे में ही फेयर हिट हो गया है। 75-80 हजार लोगों ने बिजनेस डे का टिकट लेकर मेले का भ्रमण किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शनिवार और रविवार को वीकेंड होने के नाते मेले में उम्मीद से अधिक भीड़ जुटेगी।
सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के नजदीक स्थित प्रगति मैदान के गेट नंबर 10 और भैरो मार्ग से गेट नंबर 4 पर हॉल के नजदीक तक आने जाने के लिए ई-रिक्शे का इंतजाम किया गया है। दिल्ली मेट्रो के 67 स्टेशनों के अलावा आईटीपीओ के सोशल मीडिया प्लेटफार्म और उसकी वेबसाइट से ऑनलाइन भी टिकट खरीदे जा सकते हैं।
मध्यप्रदेश दिवस पर रंगारंग कार्यक्रम
शुक्रवार को मेले में मध्य प्रदेश दिवस था। इस दौरान एंफीथियेटर में दोपहर से लेकर देर शाम तक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश से आए लोक कलाकारों ने लोक गीत, संगीत व नृत्य की अनूठी प्रस्तुति की। दोपहर से ही एंफीथियेटर दर्शकों से भरा हुआ था, जिसके कारण यहां खड़े होने की जगह नहीं थी। शनिवार को भी केरल दिवस के मौके पर यहां अनेक मनमोहक गीत, संगीत व नृत्य देखने को मिलेंगे। बगल में अनेक राज्यों के अलग-अलग खाने पीने के स्टॉल भी लगाए गए हैं।
600 साल पुरानी सोजनी शॉल ने बढ़ाई जम्मू-कश्मीर पवेलियन की रौनक
जम्मू कश्मीर की परंपरागत 600 साल पुरानी सोजनी शॉल ट्रेड फेयर की रौनक बनी है। जम्मू कश्मीर पवेलियन में इसे देखा जा सकता है। सैकड़ों साल पहले एक फकीर के साथ इस डिजाइन की शॉल ईरान से कश्मीर पहुंची थी। अब यह खास डिजाइन वाली शॉल कश्मीर के सनया गांव की पहचान बनी है। मौजूदा समय में इस गांव के करीब 350 लोग शॉल बनाने का काम करते हैं। शॉल बनाने वाले बडगाम जिले के बशीर अहमद भट्ट को उनके उत्कृष्ट काम के लिए राष्ट्रीय शिल्प गुरु और राष्ट्रीय कला सम्मान मिल चुके हैं।
प्रगति मैदान में हॉल की ऊपरी मंजिल पर स्थित जम्मू कश्मीर पवेलियन में सोजनी शॉल उपलब्ध है। इसका कपड़ा पश्मीना ऊन का होता है और इसपर हाथों से कढ़ाई का काम कश्मीरी सिल्क से किया जाता है। एक शॉल को बनाने में कम से कम तीन महीने का वक्त लगता है।
50 हजार से 7 लाख रुपये तक कीमत
सोजनी शॉल अब तक 50 हजार से लेकर सात लाख तक बिकी है। छोटे-बड़े बॉर्डर और शॉल पर हुई कढ़ाई के मुताबिक इसकी कीमत तय होती है। बशीर अहमद भट्ट 45 साल से सोजनी शॉल बना रहे हैं। मौजूदा समय जिस शॉल पर वह काम कर रहे हैं, उसे बनाते तीन साल बीत गए हैं।