भाजपा विधायक विजेन्द्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत मानहानि मामले में अपने खिलाफ जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने याचिका पर मंगलवार को सुनवाई तय की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने दायर याचिका में निचली अदालत के फैसले को गलत बताते हुए तुरंत सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने कहा निचली अदालत ने उन्हें समन जारी कर 16 नवंबर को पेश होने का निर्देश दिया था। ऐसे में जल्द सुनवाई जरूरी है। पीठ ने उनके याचिका पर सोमवार को ही सुनवाई के आग्रह को खारिज करते हुए कहा याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की जाएगी।
मामला दिल्ली सरकार द्वारा 1,500 बसों की खरीद से जुड़ा है। विजेन्द्र गुप्ता ने आरोप लगाया था कि बसों की खरीद में घोटाला हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था। राउज एवन्यू स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविन्द्र कुमार पांडेय ने अपने फैसले में कहा था कि सभी साक्ष्यों व गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि आरोपी गुप्ता ने जानबूझ कर शिकायतकर्ता की मानहानि की है और उन पर मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ता व गवाहों के बयानों को देखने के बाद स्पष्ट है कि आरोपी विजेन्द्र गुप्ता ने धारा 499, 500 व 501 के तहत अपराध किया है और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के साक्ष्य हैं। अदालत ने विजेन्द्र गुप्ता के खिलाफ सम्मन जारी कर 16 नवंबर को पेश होने का निर्देश दिया था।
याची गहलोत ने आरोप लगाया कि विजेन्द्र गुप्ता ने बदनियति, राजनीतिक फायदा पाने व उनकी प्रतिष्ठा खराब करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा डीटीसी के लिए 1,500 बसों की खरीद को लेकर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। गुप्ता ने अपने ट्विटर, फेसबुक पर बदनीयति से आरोप लगाए। इतना ही नहीं गुप्ता ने घोटाले के लिए व्यक्तिगत रुप से उनका नाम भी लिया। हालांकि आरोपों को लेकर उपराज्यपाल ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया और कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के घोटाले से इंकार किया है। याची ने कहा कि इस रिपोर्ट के आने के बाद स्पष्ट है कि गुप्ता मात्र राजनीतिक फायदे के लिए उनकी प्रतिष्ठा खराब कर रहे है।