एमसीडी ने बीते 24 जनवरी को सदन में महापौर, उपमहापौर व स्थायी समिति के छह सदस्यों का चुनाव नहीं होने के लिए भाजपा पार्षदों को कठघरे में खड़ा किया है। एमसीडी ने सदन की बैठक में हंगामा के संबंध में दिल्ली सरकार के माध्यम से उपराज्यपाल को भेजी रिपोर्ट में भाजपा पार्षदों को जिम्मेदार ठहराया है। एमसीडी ने कहा है कि पार्षदों को शपथ दिलाने के बाद भाजपा के पार्षदों ने हंगामा किया। इस कारण सदन में कामकाज ठप होने की नौबत आने पर पीठासीन अधिकारी को बैठक स्थगित करनी पड़ी।
सूत्रों के अनुसार एमसीडी ने बैठक के संबंध में उपराज्यपाल को बिंदुवार रिपोर्ट भेजी है। एमसीडी ने रिपोर्ट में पीठासीन अधिकारी पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया है, वहीं आप सदस्यों को भी हंगामा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। एमसीडी ने रिपोर्ट में लिखा है कि पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने पार्षदों को शपथ दिलाने के बाद कार्यसूची के तहत महापौर का चुनाव कराने की तैयारी के निर्देश दिए और उन्होंने कुछ पल के लिए बैठक स्थगित कर दी। इसी बीच दोनों पक्षों के पार्षद अपने नेताओं व दलों के नारे लगाने शुरू कर दिए।
पीठासीन अधिकारी ने आने पर आप के पार्षद शांत होकर अपनी सीटों पर बैठ गए, लेकिन भाजपा पार्षद शांत नहीं हुए और वे आप पार्षदों पर गाली देने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करते रहे। इस दौरान सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी और पीठासीन अधिकारी ने 15 मिनट तक बैठक स्थगित कर दी। पुन: बैठक शुरू होने के दौरान भी भाजपा पार्षद शांत नहीं हुए और वे आप पार्षदों पर गाली देने का आरोप लगाते रहे। इस कारण पीठासीन अधिकारी ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
किसी पर कार्रवाई की मांग नहीं
सूत्रों ने बताया कि एमसीडी ने अपनी रिपोर्ट में उपराज्यपाल से किसी भी दल के पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की है। एमसीडी ने केवल सदन की बैठक की तिथि तय करने का आग्रह किया है। एमसीडी नेे गत छह जनवरी को सदन की बैठक में हंगामा होने के संबंध में भी इसी तरह उपराज्यपाल को रिपोर्ट भेजी थी। उस दौरान एमसीडी ने आप सदस्यों को हंगामे के लिए दोषी ठहराया था, लेकिन एमसीडी नेे आप सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की थी।