दिल्ली में तीन बार लगातार सरकार चला चुकी कांग्रेस इस समय सत्ता से बाहर है। लेकिन हाल ही में कई राज्यों में मिली सफलता ने उसे दिल्ली के लिहाज से भी उत्साहित कर दिया है। ऐसे में दिल्ली में वापसी के लिए उसकी क्या योजनाएं हैं, ये समझने के लिए हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश:-
आप जिन चेहरों की बात कर रहे हैं, क्या वे बार-बार फेल नहीं हो रहे हैं? भाजपा के पास नरेंद्र मोदी का चेहरा हरियाणा में भी था, महाराष्ट्र में भी और झारखंड में भी। उन्होंने हर राज्य में जाकर खूब प्रचार भी किया, लेकिन हुआ क्या? इसके पहले भी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा के पास नरेंद्र मोदी का ब्रांड था। वहां क्या हुआ? इसी ब्रांड के चक्कर में देश की अर्थव्यवस्था का नाश हो गया है। देश अब इस ब्रांड की असलियत पहचान चुका है।
कांग्रेस इन मुद्दों में कभी नहीं उलझती। हमारा नेतृत्व इन मुद्दों पर हमेशा हमें मार्गदर्शन देता आया है। आगे भी जैसी जरूरत होगी, नेतृत्व तय करेगा। हम सभी कांग्रेसी सोनिया जी, राहुल जी और प्रियंका जी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। इन स्टार नेताओं के रहते हमें किसी और की जरूरत महसूस नहीं होती। बाकी जहां तक आप चेहरे की बात कर रहे हैं, जेपी अग्रवाल, अजय माकन और अरविंदर सिंह लवली जैसे हर समाज में अच्छी पकड़ रखने वाले एक से बढ़कर एक स्थानीय चेहरे हमारे पास हैं।
दिल्ली की जनता बेहद संवेदनशील है। वह बड़ी संवेदनशीलता के साथ हर मुद्दे को देख रही है और वोटों के जरिये वह अपनी राय भी जरूर रखेगी। वह देख रही है कि किस प्रकार केंद्र सरकार नागरिकता कानून के जरिये देश को जलाने की साजिश रच रही है और किस प्रकार इस मुद्दे पर भी अरविंद केजरीवाल चुप हैं। जामिया हो या जेएनयू, दिल्ली यूनिवर्सिटी हो या कहीं और, ये सरकार हर जगह लोगों को डरा रही है।
लोगों पर डंडे बरसाए जा रहे हैं और उन्हें डराकर चुप कराने की साजिश हो रही है। नोटबंदी हो या जीएसटी, हर तरीके से लोगों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है, सीलिंग के जरिये व्यापारियों की रीढ़ तोड़ी जा रही है। आपको क्या लगता है व्यापारी, छात्र और अल्पसंख्यक चुप बैठ जायेंगे? वे इस सरकार की नींव हिला देंगे। चुनाव आने दीजिये आपको पता चल जायेगा कि देश क्या चाहता है?
जरा पता कीजिये कि इसी सर्वे ने हरियाणा चुनाव के पहले कांग्रेस को कितनी सीटें दी थीं। उन्होंने हमें केवल तीन सीटें दी थीं, जबकि कांग्रेस ने 31 सीटें हासिल की। यही हाल दिल्ली में भी होगा। ये सर्वे बार-बार असफल साबित हो रहे हैं। इस बार भी असफल ही साबित होंगे।
आपकी बात सही है। पिछले कुछ समय से पार्टी ने दिल्ली में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। लेकिन इस बार हम वापसी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हम जनता के पास उन्हीं मुद्दों को लेकर जा रहे हैं, जो हमने शीला दीक्षित के नेतृत्व में 15 साल के शासन में करके दिखाए हैं। कभी आधी दिल्ली में स्लम का कब्जा हुआ करता था। इन क्षेत्रों में रहने वालों को पक्के मकान देकर एक तरफ हमने उनकी जिन्दगी खुशहाल की है, तो वहीं दूसरी तरफ हमने दिल्ली को विश्व स्तर का शहर बनाने का काम किया है।
देखिये, अरविंद केजरीवाल ने केवल तीन महीने पहले इन योजनाओं को लागू किया है। इन योजनाओं के नोटिफिकेशन में भी केवल 31 मार्च की तारीख लिखी है। यानी इधर फरवरी में चुनाव खत्म, उधर मुफ्त की योजनायें भी खत्म। इस सरकार ने दिल्ली के लोगों को वो सुविधाएं भी नहीं दी हैं, जिन्हें हमने (कांग्रेस) ने लागू किया था। हमने दस हजार से ज्यादा लोगों को पेंशन दी थी। इस सरकार ने हजारों लोगों की पेंशन बंद कर दी।
हम जनता से वायदा करते हैं कि सत्ता में आने पर 600 यूनिट तक बिजली की राहत देंगे, पेंशन योजना की राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये महीने तक करेंगे। छात्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा का अधिकार देंगे। इसी तरह की और भी बहुत सी योजनायें हम जनता के सामने अपने घोषणा पत्र के जरिये पेश करने जा रहे हैं। हमें यकीन है कि जनता हमें मौका जरुर देगी।
इन दोनों को ये मुद्दे ऐसे समय में याद आये हैं, जब चुनाव में एक महीने भी नहीं बचे हैं। इनसे पूछिये कि अगर ये पांच साल पहले इन योजनाओं को लागू करते तो आज तक दिल्ली के सभी लोगों को अपने घरों का मालिकाना हक मिल चुका होता। अभी तक इन योजनाओं को लागू करने से इन्हें किसने रोका हुआ था? दिल्ली समझ रही है कि ये वोटों की सियासत के आलावा और कुछ नहीं है। जबकि कांग्रेस ने दस हजार से ज्यादा झुग्गी वालों को पक्के मकान दिए हैं। इन्हें आज भी देखा जा सकता है।
‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ की योजना कांग्रेस ने चलाई थी। आज भाजपा उसकी नकल कर रही है। हम अभी भी झुग्गी वालों को पक्के मकान और कच्ची कालोनी के लोगों को पक्की रजिस्ट्री का हक देंगे। इंदिरा गांधी और शीला दीक्षित सरकार ने लाखों लोगों को घर का अधिकार दिया था। विकास की वही राजनीति हम दोबारा शुरु करेंगे।