फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली : 27 हफ्ते के भ्रूण को गिराने पर एम्स का मेडिकल बोर्ड लेगा फैसला, सुनवाई चार दिन बाद

Thu, 23 Dec 2021 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

यह बोर्ड जल्द से जल्द महिला की जांच करेगा और गर्भ टर्मिनेट करने पर अपना निर्णय देगा। भारत में कुछ अपवाद छोड़कर 24 हफ्ते से अधिक उम्र के भ्रूण को टर्मिनेट करना गैरकानूनी है।
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अपने 27 हफ्ते के भ्रूण को कमजोर सेहत व जीवित बचने की कम संभावना के चलते टर्मिनेट करवाने के लिए आई एक महिला की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स के चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है।

विज्ञापन


यह बोर्ड जल्द से जल्द महिला की जांच करेगा और गर्भ टर्मिनेट करने पर अपना निर्णय देगा। भारत में कुछ अपवाद छोड़कर 24 हफ्ते से अधिक उम्र के भ्रूण को टर्मिनेट करना गैरकानूनी है। मामले पर अगली सुनाई 27 दिसंबर को होगी।

याचिकाकर्ता 33 साल की महिला की अधिवक्ता स्नेहा मुखर्जी और सुरभि शुक्ला ने जस्टिस रेखा पल्ली के समक्ष बताया कि प्रसव में भ्रूण के बचने की संभावना 50 प्रतिशत है। उसकी स्थिति बेहद खराब है, जन्म के बाद भी उसका हृदय बंद होने की आशंका है।
विज्ञापन


 महिला मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी अधिनियम के तहत इसे टर्मिनेट करना चाहती है, लेकिन अधिकारी अनुमति नहीं दे रहे। गर्भपात को असुरक्षित बना कर महिला की जान को खतरे में डाला जा रहा है। यह भारत में मातृत्व मृत्यु दर खराब होने की भी वजह है। 24 हफ्ते बाद गर्भपात न करवा पाने के अधिनियम के अतार्किक नियम से महिला की मानसिक स्थिति बिगड़ रही है। 

अपवाद हैं, लेकिन अधिनियम में 2021 के संशोधन के तहत अपवाद मामलों में गर्भपात की अनुमति 20 से बढ़ाकर 24 हफ्ते की गई है। यह अपवाद दुष्कर्म या अनाचार सर्वाइवर और नाबालिग व दिव्यांग महिलाओं के लिए हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें