गुलेरिया ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य के मामले में शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में काफी भेदभाव है। इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। और कभी कभी मुझे इस बात की चिंता होती है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी से यह भेदभाव बढ़ना नहीं चाहिए।
एम्स प्रमुख ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अभी बहुत फोकस करना है और हमें गैर संचारित बीमारियों की स्क्रीनिंग या कैंसर के मामलों में हमें यह करना है, जिससे बीमारी का बोझ व्यापक स्तर पर कम करने में मदद मिलती है। हमे शोध में और निवेश करना होगा, जो भारत के लिए जरूरी है और इससे नवोन्मेष को और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आरएस शर्मा ने कहा कि कई क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर खर्चा कम किया जा सकेगा और उस कमी से सेवा प्रदाताओं और जनता पर भी असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा, मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं कि प्रौद्योगिकी को समावेशी होना होगा। यह इस सेक्टर में पहले से मौजूद है तो इसमें विविधता लानी होगी। इसे ऐसा बनना होगा कि लोग इसका आसानी से उपयोग कर सकें।
निजता के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि निजता का सोचेंगे तो इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी। बात ये है कि आप जानते हैं कि मैं अगर काम छिपाता हूं तो मैं इससे कुछ नहीं कर सकता। लेकिन बात ये नहीं है। अगर आप सावधानीपूर्वक डिजायन करेंगे तो आपको निजता से समझौता किए बिना ही इसकी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकेंगे।