स्वास्थ्य कर्मचारियों सहित फ्रंटलाइन वर्कर ने कोरोना महामारी में सबसे आगे रहकर मुकाबला किया। इस दौरान कई कर्मचारियों की संक्रमण की चपेट में आने से मौत भी हुई। अलग अलग संगठनों की मानें तो दिल्ली में अब तक करीब 100 से ज्यादा फ्रंटलाइन वर्कर की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है। जबकि सरकारी रिपोर्ट से जुड़े तथ्य कुछ और ही दावा कर रहे हैं।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में बीते दो साल में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने के कारण मरने वाले कर्मचारियों में से 56 के आवेदन उन्हें प्राप्त हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन सभी आवेदन को अब तक संज्ञान में लाया जा चुका है। कोरोना योद्घाओं के परिजनों को सरकार ने 28 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता भी की है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार कोरोना योद्घा के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। इसी के तहत उनके पास बीते सप्ताह तक 56 आवेदन आए थे जिनकी प्रक्रिया भी अब पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कई आवेदन ऐसे भी पहुंचे जिन्हें बाद में इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि उक्त कर्मचारियों की मौत ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से नहीं हुई थी। इसके अलावा ऐसे भी परिवारों ने आवेदन किया है जिनकी ड्यूटी कोविड में नहीं थी।
हालांकि दिल्ली नर्सिंग फेडरेशन के अनुसार ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कर्मचारियों की संख्या सरकारी आंकड़ों की तुलना में कहीं अधिक है। हाल ही में नर्सिंग फेडरेशन ने लोकनायक अस्पताल में मरने वाले कर्मचारियों के परिवारों को मदद पहुंचाने के लिए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। इनके अनुसार दिल्ली में अब तक आठ नर्सिंग कर्मचारियों की मौत हुई है जिनमें से एक की पत्नी को आर्थिक सहायता करने के लिए सरकार ने बीते दिनों निर्देश जारी किए थे। बाकी परिवारों को अब तक कोई सहायता नहीं मिली है।