दिल्ली में मेट्रो व डीटीसी और क्लस्टर बसों में यात्रियों को 100 प्रतिशत क्षमता के साथ यात्रा की अनुमति देने संबंधी दिल्ली सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याची ने कहा कि यात्रियों को खड़ा होकर यात्रा करने की अनुमति यह कहते हुए प्रतिबंध लगाया गया है कि इस तरह की कार्रवाई से सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का उल्लंघन होगा। याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी।
अधिवक्ता एसबी त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका में दिल्ली सरकार को 50 प्रतिशत बैठने की क्षमता वाली दिल्ली मेट्रो और बसों को चलाने की अनुमति देने और यात्रियों को खड़े होने की अनुमति देने के लिए भी निर्देश देने की प्रार्थना की गई है।
याची ने कहा कि महामारी की तीसरी लहर की संभावना है और यात्रियों को इस प्रकार 100 प्रतिशत क्षमता से यात्री की अनुमति देने से तय नियमों का ही उल्लंघन नहीं हो रहा बल्कि इससे महामारी के बढ़ने की भी संभावना बन गई है। ऐसे में यात्रियों को 50 प्रतिशत बैठने व अन्य को खड़े होकर यात्रा की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का सख्ती से पालन हो सके।
याची ने कहा कि कोविड की तीसरी लहर का खतरा अभी बना हुआ है और दिल्ली सरकार ने मेट्रो और बसों में यात्रियों के 100 प्रतिशत बैठने की क्षमता की अनुमति देकर इस तरह के तथ्य की अनदेखी की है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार के अन्य मामलों के विपरीत है। सरकार ने सभी रेस्तरां, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स आदि को 50 प्रतिशत लोगों को बैठने की क्षमता पर चलाने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में परिवहन सेवाओं के लिए अलग-अलग नियम बनाने का कोई आधार नहीं है और रेस्तरां, बार, सिनेमा हॉल, थिएटर, मल्टीप्लेक्स के लिए अलग-अलग नियम कैसे तय किए जा सकते है।
याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष तय थी लेकिन उन्होंने कहा कि कोविड से संबंधित मामलों की सुनवाई विशेष पीठ कर रही है ऐसे में इस याचिका पर भी उसी पीठ को सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए।