नई दिल्ली। राजधानी में लगातार बारिश होने के कारण ग्रामीण इलाके में बाढ़ जैसे हालत हो गए हैं। कई गांवों के खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई और कमल के फूल खिलने लगे हैं। खेतों में अत्यधिक पानी भरने के कारण अगली फसल की बुवाई करने का भी संकट पैदा हो गया है, क्योंकि पानी निकालने का कोई रास्ता नहीं है। हालांकि किसानों ने खेतों को फसल की बुवाई के लिए तैयार रखने के मद्देनजर कमल की बेल उखाड़नी शुरू कर दी है।
समयपुर, उजवा, दरियापुर खुर्द, मलिकपुर, झुलझुली, सारंगपुर, रावता, गालिबपुर, दौराला, घुमनहेड़ा, हसनपुर, रानी खेड़ा, रसूलपुर, घेवरा, मदनपुर, सवादा, हिरण कूदना, नीलवाल, दिचाऊं कलां, झाड़ौदा कलां, कैर, मुंडेला कलां, मुंडेला खुर्द, ईसापुर, कंझावला, लाडपुर, जोंती, टटेसर, कुतुबगढ़, कटेवड़ा, मुंगेशपुर, औचंदी, हरेवली, दरियापुर कलां आदि गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। खेतों में पानी जमा होने से ज्वार, बाजरा की फसल नष्ट हो गई है। घीया, तौरी, गोभी जैसी सब्जी की फसल भी खराब हो गई है। वहीं धान की भी फसल नष्ट होने लगी है।
मदनपुर गांव के किसान जगजीत सिंह के अनुसार खेतों में पानी जमा होने से तमाम फसल बर्बाद हो गई है। वहीं गाजर, मूली, मटर आदि फसल लगाने का संकट पैदा हो गया है, क्योंकि इन की बुवाई का समय नजदीक आ गया है, लेकिन खेतों में पानी जमा है। इसके अलावा सरसों व गेहूं के साथ-साथ पशुओं के लिए बरसम व जई की भी बुवाई करना असंभव हो गया है।
उधर नजफगढ़ इलाके के समयपुर, उजवा, दरियापुर खुर्द, मलिकपुर, झुलझुली, सारंगपुर समेत कई गांवों में फसल नष्ट होने के बाद कमल की बेल उग गई है। खेतों में कमल के फूल खिले हुए हैं, मगर किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। दरअसल इन गांवों में दो माह से बारिश का पानी भरा हुआ है। झुलझुली निवासी दीपक यादव कहते हैं कि खेतों में कमल की बेल उगने के कारण फसलों की बुवाई करने में दिक्कत आ सकती है। इस कारण किसानों ने कमल की बेल उखाड़नी शुरू कर दी है।
दरियापुर के किसान अभिषेक के अनुसार उनके गांव एवं आसपास के आधा दर्जन गांवों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है और नष्ट हो गई है। वहीं औचंदी गांव के किसान धर्मपाल बताते हैं कि खेतों में पानी जमा होने के कारण ज्वार व बाजरा की फसल बर्बाद हो गई है।
दिचाऊं कलां के किसान प्रदीप शौकीन के अनुसार खेतों में बाढ़ जैसे हालात होने पर उनके गांव के साथ-साथ आसपास के चार-पांच गांवों के किसानों की गोभी की फसल नष्ट हो गई है। इसी तरह तमाम गांवों में घीया व तौरी की फसल भी खराब हो गई है।