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विश्व कैंसर दिवस : विशेषज्ञों ने किया आगाह- कोरोना ने कैंसर रोगियों में 57% तक बढ़ाया खतरा

Fri, 04 Feb 2022 03:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

विश्व कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर राजधानी के विशेषज्ञों ने दी जानकारी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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बीते दो साल से देश कोरोना महामारी का सामना कर रहा है। इस संक्रामक रोग ने हर क्षेत्र को प्रभावित किया है लेकिन वायरस का सबसे अधिक जोखिम कैंसर रोगियों पर पड़ा है। इस बीमारी ने कैंसर रोगियों में खतरा 57 फीसदी तक बढ़ा दिया है। बृहस्पतिवार को विश्व कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर विशेषज्ञों ने कैंसर और महामारी को लेकर जानकारी साझा की।

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एम्स के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, कैंसर के अलग-अलग स्वरूप देखने को मिलते हैं लेकिन महामारी में सबसे अधिक जोखिम रक्त कैंसर के रोगियों का बढ़ा है। रक्त कैंसर के रोगियों में अन्य प्रकार के कैंसर वाले रोगियों की तुलना में कोविड-19 जोखिम 57 फीसदी अधिक था। इसमें भी ब्लड कैंसर या ल्युकेमिया, मॉयलोमा के रोगी सर्वाधिक चपेट में आ रहे हैं।

एक अध्ययन के मुताबिक, ब्लड कैंसर के मरीजों को अन्य की तुलना में 57 फीसदी ज्यादा कोरोना से संक्रमित होने का खतरा है। यहां कैंसर रोगियों का जिक्र खासतौर पर इसलिए कर रहे हैं कि मौजूदा वैश्विक महामारी कोरोना में सबसे ज्यादा दिक्कतें कैंसर के मरीजों को ही हो रही हैं। यही नहीं कोरोना के कारण कैंसर पीड़ितों के इलाज और उनकी देखभाल में भी काफी बदलाव आया है। एम्स ने अब तक कैंसर और कोरोना संक्रमण को लेकर दो चिकित्सीय अध्ययन किए हैं और इनमें पता चला है कि सामान्य कोविड रोगी की तुलना में कैंसर मरीज के संक्रमित होने से जान का जोखिम सात गुना तक अधिक है।
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क्या कहते हैं डॉक्टर

  • एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर जीके रथ का कहना है कि कोरोना महामारी ने कैंसर रोगियों की परेशानी को काफी बढ़ाया है। संक्रमण का जोखिम इन मरीजों में सबसे अधिक है। चूंकि कैंसर का उपचार करना भी समय रहते जरूरी है। ऐसे में इन मरीजों को ध्यान में रखते हुए कीमो इत्यादि प्रक्रिया को सावधानी से करना चाहिए। इसके अलावा मरीजों को भी अपना बचाव करना बेहद जरूरी है।
  • दिल्ली के धर्मशिला अस्पताल के डॉक्टर राजित चानना बताते हैं कि कैंसर पीड़ित के साथ ही उनकी देखभाल करने वालों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि कोरोना संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। यही नहीं कैंसर रोगियों के लिए चेक-अप क्षेत्र अलग होने के साथ स्क्रीनिंग भी अनिवार्य किए जाने की जरूरत है।
  • बालाजी एक्शन कैंसर अस्पताल के डॉक्टर जेबी शर्मा का कहना है कि कीमोथेरेपी जैसे उपचार के बाद प्रतिरोधक शक्ति कमजोर पड़ जाती है। कीमोथेरेपी के कारण शरीर में श्वेत रुधिर कणिकाओं का बनना कम हो जाता है। चूंकि ये शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली का प्रमुख अंग होती हैं। इन्हें शरीर का भरोसेमंद सुरक्षागार्ड भी आप कह सकते हैं। ऐसी स्थिति में कैंसर पीड़ित के कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है है।


पीएम को लिखा पत्र, कैंसर रोगियों को मिले पंचकर्म की सुविधा
आयुर्वेद विशेषज्ञ और पंचकर्म अस्पताल (प्रशांत विहार) के चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरपी पाराशर का मानना है कि आयुर्वेद के जरिये भी कैंसर का उपचार संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि अस्पतालों में कैंसर के सभी मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिससे बहुत से मरीजों की जान तो बचेगी ही, कैंसर पर होने वाले खर्च को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

पंचकर्म चिकित्सा पद्धति शरीर को डिटॉक्सिफाई करने और शरीर के सेल्स को पुनर्जीवित करने का काम करती है, इसलिए पंचकर्म चिकित्सा कैंसर से बचाव और इलाज में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है। नियमित रूप से उम्र के अनुसार साल में एक या दो बार पंचकर्म चिकित्सा लेने से शरीर डिटॉक्सिफाई हो जाएगा और शरीर में कैंसर के असामान्य सेल्स की वृद्धि नहीं होगी।

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