हाल ही में जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में प्रकाशित इस अध्ययन में डॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली में लक्षणग्रस्त कोरोना मरीजों में सबसे ज्यादा बुखार और खांसी की परेशानी वाले थे। इनकी संख्या अनुमानित तौर पर 94.40 फीसदी तक थी। जबकि शेष 5.6 फीसदी रोगियों में कोई लक्षण नहीं था। इससे साफ पता चलता है कि दिल्ली में बगैर लक्षण वाले कोरोना मरीज काफी कम थे। जबकि सरकारें यही दावा कर रही थीं कि ज्यादातर लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं हैं या फिर हल्का असर है।
ऐसे किया है अध्ययन
डॉक्टरों ने बताया कि उनके अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों के चिकित्सीय दस्तावेजों की समीक्षा करते हुए एक डाटा तैयार किया गया और फिर उस डाटा के अनुसार एक परिणाम निकाला गया है। अध्ययन में उन्हीं मरीजों को लिया गया जिनकी आरटी पीसीआर जांच रिपोर्ट पॉजीटिव थी। इसमें पता चला कि 37 फीसदी रोगियों में सबसे अधिक उच्च रक्तचाप सह-रुग्णता थी। जबकि 43 फीसदी रोगियों में कोई सह-रुग्णता मौजूद नहीं थी। यानी संक्रमित होने से पहले ये सभी पूरी तरह से स्वस्थ थे।
नौ से 11 दिन तक अस्पताल में रुके मरीज
अध्ययन में यह भी बताया चला है कि दिल्ली में पहली चार लहर के दौरान एक कोरोना मरीज को अस्पताल में औसतन नौ से 11 दिन तक रहना पड़ा। इस दौरान जिन लोगों की मौत हुई है उनमें बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक थी। अध्ययन के अनुसार सिर्फ 11 फीसदी ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। जबकि 50 फीसदी से ज्यादा मरीज अपने घरों में ही क्वारंटीन थे।