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चिंताजनक: जिन्हें जान का जोखिम सबसे ज्यादा, 95 फीसदी संक्रमण भी उन्हीं में, विभाग ने किया अलर्ट

Wed, 12 Jan 2022 12:10 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल लोकनायक की बात करें तो अकेले इसी अस्पताल में 136 में से 130 मरीज ऐसे ही जोखिम वाले हैं जिनमें पहले से कोई बीमारी है और इन्हें संक्रमण के स्त्रोत के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। यह अन्य दिनों की भांति दूसरी बीमारी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे और इनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। 
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फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण को लेकर दिल्ली के अस्पतालों में एक अलग स्थिति देखने को मिल रही है। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है उनमें कोरोना संक्रमण का जोखिम सबसे अधिक माना जा रहा है लेकिन राजधानी के अस्पतालों में 95 फीसदी तक भर्ती मरीज भी यही हैं। यह मरीज किसी और बीमारी का इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे और वहां डॉक्टर ने इनकी जांच कराई तो कोविड संक्रमित मिले। 
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दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल लोकनायक की बात करें तो अकेले इसी अस्पताल में 136 में से 130 मरीज ऐसे ही जोखिम वाले हैं जिनमें पहले से कोई बीमारी है और इन्हें संक्रमण के स्त्रोत के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। यह अन्य दिनों की भांति दूसरी बीमारी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे और इनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। 

दिल्ली सरकार के आंकड़ों को ही देखें तो 46 में से 34 मरीजों की मौतें भी उन्हीं लोगों की हुई हैं जिनमें कोरोना से पहले कोई अन्य बीमारी थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को सचेत किया है। विभाग ने जिन मरीजों में संक्रमण से पहले कोई बीमारी है उनकी तबियत को गंभीरता से लेने और वरिष्ठ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार करने के निर्देश तक दिए हैं। 
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अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार इन्हीं रोगियों की वजह से लगातार स्वास्थ्य कर्मचारियों में संक्रमण भी प्रसारित हो रहा है। जिन लोगों को पहले से कोई परेशानी है वह उपचार कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। यहां ओपीडी या फिर इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखा रहे हैं। बाद में पता चला रहा है कि वह मरीज कोरोना संक्रमित है। मरीज के संपर्क में आए डॉक्टर या अन्य स्टाफ भी संक्रमण की चपेट में आ रहा है। 
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विभागीय अधिकारियों की मानें तो यह स्थिति गंभीर संकट भी पैदा कर सकती है क्योंकि किसी की आयु अधिक है और उसे पहले से कोई बीमारी है तो यह दोनों हालात संक्रमण के मोडरेट अथवा सीरियस वायरल लोड की आशंका को बढ़ा देते हैं। इन्होंने यहां तक बताया है कि दिल्ली के अस्पतालों में अभी 500 से ज्यादा मरीज ऑक्सीजन थैरेपी पर हैं और इतने ही मरीज आईसीयू में हैं। इन मरीजों की अगर केस हिस्ट्री देखते हैं तो 80 से 90 फीसदी तक वही हैं जिनमें अन्य बीमारियां हैं। 
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