कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोलंकी (बाएं) और किसान राजेन्द्र सिंह डागर (दाएं)
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बजट से दिल्ली के किसानों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं। न तो दिल्ली में फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिल रहा है और ही लागत भी न मिलने से किसानों की परेशानियां बनी हुई हैं। बजट में किसानों के लिए ऋण में बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि पहले ही कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं। किसानों को इस बार बजट से कर्ज माफी की उम्मीद थी।
झाड़ौदा कलां के किसान राजेन्द्र सिंह डागर का कहना है कि सरकार ने 2022 तक किसानों की दोगुना आमदनी की बात दोहराई है। लेकिन दिल्ली के किसानों का रोना है कि उन्हें दिल्ली में किसी भी फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने से दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। ऋण के लिए प्रावधान करने की बजाय कर्ज माफी से किसानों को राहत मिल सकती थी।
गांव नीलवाल के किसान गोपी राम का कहना है कि किसानों को बजट से काफी उम्मीदें थीं। किसानों को दिल्ली की मंडी में भाव नहीं मिलते, नतीजतन उन्हें फसलों का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है। किसानों को इस साल गोभी का भाव एक रुपये प्रति किलोग्राम भी नहीं मिला। आखिरकार, पशुओं को खिलाना पड़ा। इससे प्रति एकड़ हजारों का नुकसान हुआ है।
किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोलंकी का कहना है कि बजट में दिल्ली के किसानों को कोई खास फायदा नहीं मिलेगा। किसानों की आय कैसे बढ़ेगी, जब उन्हें फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल रहा है। सरकार की ओर से महज कुछ किसानों को ही वित्तीय लाभ मिल रहा है।
गांव ईसापुर के वीरेंद्र डागर ने कहा कि किसानों को न तो मंडी में फसलों के भाव मिल रहे हैं और दिल्ली के किसानों को एमएसपी न मिलने की वजह से मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। दिल्ली के गांवों में खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार को एमएसपी सहित उन्हें राहतदेने के लिए भी पहल करनी चाहिए ताकि राहत मिल सके।