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काम की खबर: सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुआ बोन मैरो ट्रांसप्लांट, कैंसर रोगियों को मिलेगी सुविधा; इतना आएगा खर्च

Wed, 14 Jun 2023 08:28 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में केंद्र सरकार का पहला अस्पताल है सफदरजंग, जिसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल रही है। यहां ब्लड और अन्य कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए यह सुविधा दी जाती है।
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सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुई बोर्न मोरो ट्रांसप्लांट की सुविधा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी। ब्लड और अन्य कैंसर के मरीजों के इलाज में यह सुविधा दी जाती है। अभी तक यह सुविधा एम्स में ही उपलब्ध है। बुधवार से यह सुविधा सफदरजंग अस्पताल में भी शुरू हो गई। दिल्ली में यह केंद्र सरकार का पहला अस्पताल है। 

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ब्लड और अन्य कैंसर के मरीजों को होती है जरूरत
बुधवार को सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएल शेरवाल और ओएसडी डॉ. वंदना तलवार ने बहुप्रतीक्षित बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया। इस मौके पर अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक सहित अन्य उपस्थित रहे। डॉ. शेरवाल ने कहा कि अस्पताल पूरी तरह तैयार है और महीने भर के अंदर पहला बोन मैरो प्रत्यारोपण करेगा। अस्पताल में मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट खुलने से सभी गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे पहले दिल्ली में ब्लड और अन्य कैंसर के मरीजों के लिए एम्स में ही यह सुविधा दी जाती थी। 

सफदरजंग अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट होगा फ्री
सफदरजंग केंद्र सरकार का पहला अस्पताल है। जहां यह सुविधा मरीजों को बहुत कम खर्च या लगभग मुफ्त में उपलब्ध होगी। जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए 10-15 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बता दें कि सफदरजंग अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग में हर साल हजारों की संख्या में मरीज आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। अभी तक सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ता था, सुविधा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान सहित आसपास के मरीजों को लगभग मुफ्त यह सुविधा उपलब्ध होगी।

कैंसर मरीजों को लिए फायदेमंद, उत्तर भारत के तीन अस्पतालों में सुविधा
ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. कौशल कालरा ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उत्तर भारत में केवल तीन अस्पतालों में उपलब्ध है। सफदरजंग में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए पहले मरीज को चुनने के बाद उसकी जांच की जा रही हैं। जांच पूरा होने और दानकर्ता के बोन मैरो से स्टेम सेल लेने के बाद हम जल्द ही पहला प्रत्यारोपण कर सकेंगे। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जहां एक स्वस्थ दाता का रक्त या मैरो रोगी के अस्वास्थ्यकर रक्त बनाने वाली कोशिकाओं (स्टेम सेल) को स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं से बदल देता है जो बाद में लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स का निर्माण करती हैं।

डॉक्टरों की ये टीम करेगी इलाज
बोन मैरो ट्रांसप्लांट में स्वयं के शरीर (ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट) या डोनर (एलोजेनिक ट्रांसप्लांट) के कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है। यह ट्रांसप्लांट योग्य रोगियों में किया जाता है। इसमें ब्लड कैंसर, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा रोगियों और कुछ जन्मजात रोगों में एक आवश्यक उपचार प्रक्रिया शामिल है। सफदरजंग अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी की टीम से ट्रांसप्लांट में विभाग प्रमुख डॉ. कौशल कालरा और डॉ. मुकेश नगर रहेंगे। वहीं हेमेटोलॉजी विभाग से डॉ. जे एम खुंगेर और डॉ. सुमिता चौधरी की टीम बोन मैरो ट्रांसप्लांट करेगी।
 

निजी अस्पताल में आता है इतना खर्च
निजी अस्पतालों में इसके लिए 12 लाख से 25 लाख रुपए तक का खर्च आता है। एम्स दिल्ली में भी ढाई लाख से पांच लाख रुपए तक का खर्च आता है, लेकिन सफदरजंग अस्पताल में यह सुविधा बहुत काम कीमतों पर उपलब्ध होगी। सूत्रों के अनुसार ट्रांसप्लांट का खर्च बिलकुल मुफ्त होगा लेकिन कुछ दवाएं और जांच मरीजों को बाहर से लेनी पड़ सकती हैं। इसमें कुछ हजार का खर्च आ सकता है।
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कौन कर सकता है बोन मैरो दान
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सबसे पहले भाई-बहन को डोनर के रूप में वरीयता दी जाती है। अगर इनके साथ मिलान नहीं हो पाता है तो किसी को भी डोनर के रूप में लिया जा सकता है। बोन मैरो रक्तदान की तरह होता है।
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