आयोजकों ने दावा किया है कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के गंगा नदी के लिए हरिद्वार में 1916 में किए गए आंदोलन के बाद यह पहली मुहिम है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर लोगों को लामबंद किया जा रहा है।
पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले 4 जून को यमुना तट पर बनने वाली मानव शृंखला में करीब एक लाख दिल्लीवासी नदी को बचाने के लिए पांच काम करने का प्रण लेंगे। बीते महीने के जागरूकता अभियान के आधार पर आयोजकों ने दावा किया है कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के गंगा नदी के लिए हरिद्वार में 1916 में किए गए आंदोलन के बाद यह पहली मुहिम है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर लोगों को लामबंद किया जा रहा है।
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राष्ट्रवादी चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने अपने करीब छह दशकों के सामाजिक व राजनीतिक जीवन के अनुभव के आधार पर प्रेस क्लब में मीडिया को बताया कि जिस तरह का उत्साह इस वक्त यमुना संसद को लेकर दिल्ली-एनसीआर में दिख रहा है, उससे यह पंडित मालवीय के बाद का पहले सबसे बड़ा सामाजिक आंदोलन बनने जा रहा है। समाज खुद अपने स्तर पर नदी को बचाने के लिए आगे आया है। उम्मीद है कि यमुना संसद के नतीजे फलदायी होंगे।
वहीं, बुंदेलखंड की चार छोटी-छोटी नदियों को पुनर्जीवित करने वाले जल जन जोड़ो अभियान के संयोजक संजय सिंह ने बताया कि नदी के लिए उसका प्रवाह अहम है। यमुना संसद की सरकार से अपेक्षा है कि वह हथिनीकुंड व वजीराबाद से यमुना नदी में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा सार्वजनिक करे।
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संजय सिंह के मुताबिक, इसके साथ समाज अपने स्तर पर यमुना संसद में पांच ऐसे कदम उठाने का संकल्प लेंगे, जिसका यमुना की सतह पर दूरगामी असर पड़ेगा। इसके लिए जो 22 किमी लंबी मानव शृंखला वजीराबाद से कालिंदी कुंज के बीच बन रही है, आईटीओ व कालिंदी कुंज को छोड़कर वह यमुना के पूर्वी तटों पर होगी। तैयारियां अंतिम चरण में हैं।