उपराज्यपाल ने बृहस्पतिवार को पॉक्सो मामलों के त्वरित निपटारे के लिए वरिष्ठ अभियोजकों की नियुक्ति का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिया है। उन्होंने पॉक्सो से जुड़े 20 मामलों की अलग-अलग अदालतों में सुनवाई में दिल्ली सरकार और मंत्री की तरफ से देरी का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने भी पलटवार करते हुए इसे अवैध करार देते हुए एलजी के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के आरोप लगाए हैं।
दिल्ली सरकार की ओर से पॉक्सो अधिनियम की धारा 32 के तहत अधिसूचना से संबंधित फाइल सीबीआई के वरिष्ठ अभियोजकों और अभियोजकों की नियुक्ति के लिए गृह विभाग ने भेजी थी। इस संबंध में निचली अदालत ने पिछले साल अगस्त और दिसंबर में ट्रायल कोर्ट ने विभिन्न पॉक्सो न्यायालयों में सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक वर्ष के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया था। राजनिवास के एक अधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने आपराधिक घटनाओं को गलत रूप में पेश करते हुए राजनीतिकरण किया। दिल्ली में कानून के डर नहीं होने से अपराधियों ने इसका पालन नहीं किया। जब इसे लागू करने की बात आई तो इसका पालन भी नहीं किया गया, इससे जांच और न्याय में देरी हो रही है।