कृषि कानून रद्द होने, किसान आंदोलन और किसानों की मांग के संबंध में शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में आम आदमी पार्टी की पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी की झलक दिखाई दी। इस दौरान आप के संयोजक एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब के लोगों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस कड़ी में उन्होंने किसान आंदोलन के सुचारु रूप से चलने व कृषि कानून वापस होने का श्रेय पंजाब के किसानों को दिया।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसान आंदोलन की अगुवाई करने एवं उसके कामयाब होने पर पंजाब के किसानों को बधाई दी। उन्होंने पंजाब से बड़े स्तर पर ट्रैक्टर ट्रॉली में किसानों के आने की चर्चा की। उन्होंने सर्दी, गर्मी व बारिश में अनेक बाधाओं के बावजूद और कोरोना महामारी व डेंगू के प्रकोप के बीच आंदोलन में शामिल हुई पंजाब की महिलाओं की भी पीठ थपथपाई।
दूसरी ओर इस आंदोलन को यह दुनिया के इतिहास में सबसे लंबा आंदोलन करार दिया, क्योंकि इससे पहले भारत में वर्ष 1907 में एक आंदोलन हुआ था। वह भी पंजाब के किसानों का आंदोलन था और वह आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ करीब नौ माह चला था। उसके बाद अब किसानों को अपनी चुनी हुई सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ा और यह 12 माह तक चला। यह सबसे अहिंसात्मक आंदोलन रहा और संयमित आंदोलन था।
सत्ता पक्ष ने किसानों को भड़काने, गालियां देने और षड़यंत्र करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किसानों के आंदोलन को कुचला गया। लखीमपुरी खीरी की घटना बहुत ही दर्दनाक है। सरेआम सड़क पर हजारों लोगों के सामने किसानों को गाड़ी से कुचल दिया गया। अगर सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता तो कुचलने वाले को गिरफ्तार भी नहीं किया जाता, लेकिन किसान बेचारा शांत रहते हुए अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहा।
इस दौरान अपने ही देश में अपनी ही चुनी हुई सरकार के खिलाफ लड़ते-लड़ते 700 किसान शहीद हो गए। वह सभी किसानों को नमन करते है, लेकिन एक खुशी की बात यह है कि अब उनकी आत्मा को शांति मिल रही होगी, क्योंकि उन्होंने जिस चीज के लिए शहादत दी, वह लक्ष्य अंत में पूरा हुआ और किसानों की जीत हुई।